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इतने अहम क्यों हैं, ‘सुवेंदु अधिकारी’ क्या अकेले बीजेपी को दिला सकेंगे जीत?

सुवेंदु अधिकारी तृणमूल में ममता बनर्जी के बाद दूसरे सबसे ज्यादा लोकप्रिय नेता थे। उन्हें ममता बनर्जी का दाहिना हाथ माना जाता था। नंदीग्राम आंदोलन में भी उन्होंने ममता बनर्जी का साथ दिया था, जिसके बाद टीएमसी सत्ता में आई थी। इस पूरे आंदोलन का आर्किटेक्ट सुवेंदु अधिकारी को माना जाता है। वह प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री थे। उनके पास परिवहन, जल, सिंचाई मंत्रालय था।

सुवेंदु अधिकारी एक नेता के रूप में

सुवेंदु अधिकारी पूर्वी मिदनापुर जिले के एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता शिशिर अधिकारी और छोटे भाई दिव्येंदु अधिकारी, दोनों टीएमसी सांसद हैं। शिशिर अधिकारी मनमोहन सिंह सरकार में ग्रामीण विकास राज्य मंत्री भी रह चुके हैं। 2011 में ममता बनर्जी को सत्ता दिलाने में 2007 के नंदीग्राम भूमि-अधिग्रहण विरोधी आंदोलन ने बड़ी भूमिका निभायी थी। इस आंदोलन की जमीन सुवेंदु अधिकारी ने ही तैयार की थी।

टीएमसी के लिए सुवेंदु अधिकारी ऐसे नेताओं में से थे, जिनकी जमीनी स्तर पर पकड़ खासी मजबूत है। अधिकारी ने 2007 के गैर-जमीन अधिग्रहण प्रदर्शनों (जिनकी वजह से 2011 में लेफ्ट की सरकार गिरी थी), CPI(M) के गढ़ जगमहल इलाके पर कब्जे, और मालदा और मुर्शिदाबाद में TMC की मौजूदगी बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

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नंदीग्राम में आंदोलन की लहर पर सवार होकर सुवेंदु 2009 में तमलुक सीट जीत कर लोकसभा पहुंचे। तब उन्होंने सीपीआईएम के दिग्गज नेता लक्ष्मण सेठ को 1.73 लाख वोटों से पटखनी दी थी। 2014 में उन्हें फिर से चुना गया। उन्होंने पिछले विधानसभा चुनाव में पूर्वी मिदनापुर की नंदीग्राम सीट से ही जीत हासिल की थी जिसके बाद ममता बनर्जी ने अपनी कैबिनेट में उन्हें परिवहन मंत्री की जिम्मेदारी दी थी।

सुवेंदु का प्रभाव न सिर्फ उनके क्षेत्र पूर्वी मिदनापुर में है, बल्कि आस-पास की एक दर्जन से ज्यादा सीटों पर भी उनका राजनीतिक दबदबा माना जाता है। पश्चिम बंगाल के ये क्षेत्र कभी वामपंथ का गढ़ हुआ करते थे। लेकिन सुवेंदु ने अपने रणनीतिक कौशल से बीते 10 सालों के दौरान इन्हें टीएमसी का किला बना दिया। 2016 के विधानसभा चुनाव में सुवेंदु के दबदबे वाले जंगल महल, पूर्वी मिदनापुर और पश्चिमी बर्धवान जिले की 65 सीटों पर टीएमसी को करीब 48 फीसदी वोट मिले थे। ये आंकड़ा 2006 के विधानसभा चुनाव से 20 फीसदी ज्यादा था।

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शारदा चिटफंड घोटाले से क्या था कनेक्शन

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित शारदा चिटफंड घोटाले की जांच कर रही हैं, इस घोटाले में सुवेंदु अधिकारी के भी शामिल होने का आरोप लगता रहा है। कुछ समय पहले ही शारदा चिटफंड मामले के मुख्य अभियुक्त सुदीप्त सेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पत्र लिखकर उनसे पैसे लेने वाले कई नेताओं का जिक्र किया है। इस पत्र में सुवेंदु अधिकारी और टीएमसी छोड़कर भाजपा में आये मुकुल रॉय का भी नाम शामिल है।

हाल में ही इस मामले में केंद्रीय एजेंसियों की तरफ से बंगाल के जिन पांच नेताओं को नोटिस जारी किया गया है, उनमें से एक सुवेंदु अधिकारी भी हैं। ऐसे में उनकी बगावत को इस मामले से भी जोड़कर देखा जा रहा है। टीएमसी नेताओं का आरोप है कि जिस तरह से पिछले विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने केंद्रीय जांच एजेंसियों के जरिये दबाब डालकर मुकुल राय को अपने पाले में कर लिया था, अब वही तरीका वह सुवेंदु अधिकारी को लेकर अपना रही है।

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