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कांग्रेस को क्यों लगता है बीजेपी के कांग्रेस मुक्त भारत के प्लान से डर?

राजस्थान में कांग्रेस को इस बात का डर सता रहा है कि अगर गहलोत सरकार इस बार बच भी गई तो भी खतरा हमेशा मंडराता रहेगा. सचिन पायलट और उनके समर्थक विधायकों ने राजस्थान में गहलोत सरकार की जड़ें हिलाकर रख दी हैं. इतना तय है कि गहलोत सरकार पर संकट तब तक रहेगा जब तक ये सरकार रहेगी, क्योंकि बीजेपी लड़ाई बीच में छोड़ने वाली नहीं है.

उधर, कांग्रेस इस पूरे मामले को लेकर बीजेपी पर हमलावर है. कांग्रेस को कहीं न कहीं इस बात का डर है कि राजस्थान भी उसके हाथ से न निकल जाए. कांग्रेस के नेताओं के बयान के पीछे बीजेपी की सोची समझी रणनीति है, क्योंकि 2014 के चुनाव के बाद से ही बीजेपी मिशन कांग्रेस मुक्त भारत ऑपरेशन में जुटी हुई है.

झारखंड और महाराष्ट्र में भी डर
राजस्थान के हालात देखते हुए झारखंड, महाराष्ट्र से भी बयान आने लगे कि कांग्रेस समर्थित सरकारों को गिराने की कोशिश की जा रही है. राजस्थान की सियासी उठापटक के बीच झारखंड कांग्रेस के अध्यक्ष और वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव ने बयान दिया बीजेपी झारखंड में जेएमएम और कांग्रेस गठबंधन वाली हेमंत सोरेन सरकार को गिराने की कोशिश कर रही है. उन्होंने ये भी कहा कि बीजेपी उनकी पार्टी के विधायकों को पैसों का लालच देकर खरीदने की कोशिश कर रही है.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी बयान दिया कि बीजेपी की मंशा गैर बीजेपी शासित राज्यों की सरकारों को अस्थिर करने की है. पिछले हफ्ते ही उद्धव ठाकरे ने शिवसेना के मुखपत्र में दिए साक्षात्कार में कहा कि विपक्ष के कुछ लोग उनकी सरकार को गिराने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन वो कामयाब नहीं होंगे.
कांग्रेस को डर इसलिए लग रहा है क्योंकि सचिन पायलट के समर्थक 18 विधायकों ने अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. सचिन पायलट के सभी समर्थक विधायक बीजेपी शासित राज्य के फाइव स्टार होटल में पिछले दो हफ्ते से ठहरे हैं.

‘राजस्थान के सियासी खेल के पीछे बीजेपी नेतृत्व का हाथ’
दूसरी तरफ कांग्रेस का आरोप है कि राजस्थान के पूरे सियासी खेल के पीछे बीजेपी नेतृत्व का हाथ है. इससे पहले मध्य प्रदेश में कमलनाथ की सरकार, कर्नाटक में कुमारस्वामी नेतृत्व वाली कांग्रेस और जेडीएस की गठबंधन सरकार के समय भी बागी विधायकों को हरियाणा, कर्नाटक और महाराष्ट्र में रखा गया था.
पीएम मोदी ने 2014 के बाद कांग्रेस मुक्त भारत का नारा दिया था. जिसके बाद साम, दाम, दंड और भेद की नीति के साथ देश भर में मिशन कांग्रेस मुक्त भारत ऑपरेशन का काम शुरू किया.

असम में बनाई सरकार
2016 के असम विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के खिलाफ बीजेपी, एजेपी और बोडो के साथ मिलकर चुनाव लड़ी और तरुण गोगोई के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार को चलता कर दिया. इस विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को लगभग 2 प्रतिशत वोट शेयर ज़्यादा मिला था. लेकिन बीजेपी गठबंधन के कारण 65 सीटें जीत ली थी और एनडीए को 126 सीटों वाली विधानसभा में 90 सीटों पर जीत मिली थी. 2016 में केरल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को लेफ्ट पार्टियों के हाथों हार का सामना करना पड़ा.

उत्तराखंड में कांग्रेस का पत्ता साफ
2016 में उत्तराखंड में विजय बहुगुणा, सतपाल महाराज और हरक सिंह रावत के नेतृत्व में 12 विधायकों ने कांग्रेस सरकार के ख़िलाफ़ बग़ावत कर दी. इन विधायकों की बग़ावत के बावजूद भी उस समय तो हरीश रावत की सरकार बच गई लेकिन 2017 विधानसभा चुनाव से पहले 10 और विधायकों ने पार्टी छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया और विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को हार का मुंह देखना पड़ा. इसी तरह मणिपुर, गोवा में भी बीजेपी सरकार बनाने में सफल हो गई थी.

हिमाचल और गुजरात में जीत
2017 के अंत में गुजरात और हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव हुए. हिमाचल में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के नेतृत्व कांग्रेस को बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा. गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने राज्यसभा चुनाव से विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी थीं.

बीजेपी ने राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के 18 विधायकों का इस्तीफा कराकर राज्यसभा चुनाव का समीकरण बदलने की कोशिश की थी, लेकिन तब कामयाब नहीं हो पाई. उसके बाद विधानसभा में नेता विपक्ष समेत कई 10 विधायकों ने विधानसभा चुनाव से पहले इस्तीफा दिया, जिसमें से शंकर सिंह वाघेला और उनके बेटे बीजेपी में शामिल नहीं हुए थे, जबकि बाकी के 11 विधायक बीजेपी में शामिल हो गए थे. शंकर सिंह वाघेला विधानसभा चुनाव में अलग पार्टी बनाकर चुनाव लड़े. तब बीजेपी को 99 सीटें और कांग्रेस को 78 सीटें मिली थीं. गुजरात में बीजेपी बहुमत मिला.

2019 के लोकसभा चुनाव के बाद कर्नाटक में कांग्रेस और जेडीएस के 14 विधायक इस्तीफा देकर बीजेपी में शामिल हो गए. उसके बाद येदियुरप्पा की अगुवाई में कर्नाटक में एक बार फिर से कमल खिल गया.

मध्य प्रदेश में सिंधिया के सहारे वापसी
मार्च 2020 में मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया के 22 समर्थक विधायकों ने कमलनाथ सरकार से नाराजगी जताते हुए विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. सिंधिया समेत सभी विधायक बीजेपी शामिल हुए और शिवराज सिंह चौथी बार मुख्यमंत्री बने.

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