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जब संबित पात्रा ने असदुद्दीन ओवैसी को कहा नफ़रती लैला, फिर AIMIM प्रवक्ता ने कह दी ऐसी बात… अब हो रहा पछतावा

संबित पात्रा ने असदुद्दीन ओवैसी

West Bengal Election 2021: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 को लेकर सियासी पार्टियों के बीच घमासान मचा हुआ है। बीजेपी और टीएमसी के बीच कांटे की टक्कर तो चल ही रही है, छोटी पार्टियां भी वहां अपनी जमीन तलाशने में जुटी हुई है। कांग्रेस लेफ्ट गठबंधन और ISF के साथ चुनाव लड़ रही है और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM भी बंगाल में अपनी राजनीतिक पकड़ बनाने के लिए मैदान में है। पहले ये कयास लगाए जा रहे थे कि AIMIM, आइएसएफ के साथ मिलकर चुनाव लडेगी लेकिन आइएसएफ कांग्रेस, लेफ्ट के साथ आ गई जिससे असदुद्दीन ओवैसी को एक झटका लगा है। ओवैसी की पार्टी बंगाल में 10 सीटों पर चुनाव लड़ रही है।

आए दिन टीवी चैनलों पर भी चुनाव का मुद्दा गरमाया हुआ है और डिबेट में पार्टी के प्रवक्ता एक- दूसरे से भिड़ते दिख रहे हैं। न्यूज 18 के डिबेट शो, ‘आर पार ‘ में भी चुनाव के मुद्दे पर बहस चल रही थी जब बीजेपी प्रवक्ता एआईएमआईएम के प्रवक्ता वारिस पठान पर भड़क गए और कहने लगे कि ओवैसी नफरती लैला हैं। आपको बता दें कि अमित शाह के एक बयान के जवाब में ओवैसी ने कहा था कि मैं एक लैला हूं और मेरे हजारों मजनू हैं। उनका कहना था कि सभी पार्टियां उन्हें मुद्दा बनाकर अपना मतलब साधती है। उनके इसी बयान पर संबित पात्रा ने उन्हें नफरती लैला कह दिया।

उन्होंने एआईएमआईएम प्रवक्ता पर तंज कसते हुए शो के एंकर अमिश देवगन से कहा, ‘आज आप डिबेट में नफरत के ऊपर डिबेट कर रहे हैं और इसमें हेडमास्टर बनकर आए हैं एआईएमआईएम के प्रवक्ता जिन्होंने कहा था कि 100 करोड़ वर्सेज 15 करोड़। वो इस डिबेट में हेडमास्टर बनकर आए हैं। अभी ये बोल रहे थे कि लैला और मजनू। मैं बताता हूं कि लैला कौन है और मजनू कौन है।’

संबित पात्रा ने आगे कहा, ‘जहां तक ओवैसी जी का सवाल है, उनका नाम आज से मैं रखता हूं नफरती लैला। वो कोई लैला- वैला नहीं, नफरती लैला हैं और तुष्टिकरण उनकी मजनू है। ये लैला मजनू की जोड़ी है। नफरती लैला विद तुष्टिकरण मजनू।’

संबित पात्रा के इस बात पर एआईएमआईएम प्रवक्ता भड़क गए और बोले, ‘अब मैं मोदी जी के बारे में कुछ बोल दूं कैसा लगेगा।’ एआईएमआईएम प्रवक्ता ने डिबेट में कांग्रेस और बीजेपी को एक ही सिक्के का दो पहलू बताया और कहा कि दोनों ही पार्टियां हिंदुत्व का सहारा लेती हैं। एक हार्ड हिंदुत्व तो दूसरी सॉफ्ट हिंदुत्व पर राजनीति करती है।

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