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जब जशवंत सिन्हा ने इस सीएम को कहा था ” मैं एक दिन मुख्यमंत्री बन सकता हूँ, लेकिन आप कभी आईएस अफ़सर…

जशवंत सिन्हा

यशवंत सिन्हा ने 2009 का चुनाव जीता, लेकिन 2014 में उन्हें बीजेपी का टिकट नहीं दिया गया। धीरे धीरे नरेंद्र मोदी से उनकी दूरी बढ़ने लगी और अंतत: 2018 में 21 वर्ष तक बीजेपी में रहने के बाद उन्होंने पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया।

यशवंत सिन्हा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर लगातार हमला बोलते रहे हैं। टीएमसी में शामिल होने से पहले यशवंत सिन्हा ने ममता बनर्जी से उनके आवास पर मुलाक़ात की। मुलाक़ात के बाद सिन्हा ने केंद्र की मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला।

सिन्हा ने कहा, “देश दोराहे पर खड़ा है। हम जिन मूल्यों पर भरोसा करते हैं, वे ख़तरे में हैं। न्यायपालिका समेत सभी संस्थानों को कमज़ोर किया जा रहा है। यह पूरे देश के लिए एक अहम लड़ाई है। यह कोई राजनीतिक लड़ाई नहीं है बल्कि लोकतंत्र बचाने की लड़ाई है।”

यशवंत सिन्हा ने कहा, “ममता जी और मैंने साथ में मिलकर अटल जी के सरकार में काम किया था। ममता जी शुरू से ही फ़ाइटर रही हैं। आज मैं आपको बताना चाहता हूं कि जब इंडियन एयरलाइंस के विमान का अपहरण हो गया था और जब उसे आतंकवादी कंधार ले गए थे तो एक दिन कैबिनेट में चर्चा हो रही थी। उसी चर्चा में ममता जी ने कहा कि वो स्वयं बंधक बनकर जाएंगी वहाँ पर लेकिन शर्त ये होगी जो बाकी बंधक हैं उन्हें छोड़ दिया जाए।”

यशवंत सिन्हा टीएमसी जॉइन करने के मौक़े पर कहा, “आप सभी को आश्चर्य हो रहा होगा कि क्यों इस उम्र में आकर मैंने दलगत राजनीति से ख़ुद को अलग कर लिया था तो फिर किसी पार्टी में शामिल होकर सक्रिय हो रहा हूँ। आज के समय में देश एक अद्भुत बदलाव की स्थिति से गुज़र रहा है। अभी तक जिन मूल्यों को हम महत्व देते थे और ये सोचकर चलते थे कि इस पर प्रजातंत्र में हर कोई अमल करेगा ही, वो मूल्य आज ख़तरे में हैं। हम सभी इस बात से परिचित हैं कि प्रजातंत्र की ताक़त प्रजातंत्र की संस्थाएं होती हैं। जो आज लगभग, हर संस्था कमज़ोर हो चुकी है और इस बात का बेहद अफ़सोस है कि इसमें न्यायपालिका भी शामिल है।”

जब बिहार के मुख्यमंत्री से हो गई थी तकरार

यशवंत सिन्हा 1960 में आईएएस के लिए चुने गए और पूरे भारत में उन्हें 12वाँ स्थान मिला’मेरा मानता था कि कश्मीर में सभी संबंधित पक्षों से बातचीत की जाए। आरा और पटना में काम करने के बाद उन्हें संथाल परगना में डिप्टी कमिश्नर के तौर पर तैनात किया गया। उस दौरान बिहार के मुख्यमंत्री महामाया प्रसाद सिन्हा ने वहाँ का दौरा किया और यशवंत सिन्हा की उनसे झड़प हो गई।

‘मैं हर संभव उन्हें संतुष्ट करने की कोशिश करता। लेकिन उनके साथ आए सिंचाई मंत्री जो कि कम्युनिस्ट पार्टी से थे, मेरे प्रति आक्रमक होते चले गए। आखिरकार मेरा धैर्य जवाब दे गया और मैंने मुख्यमंत्री की तरफ़ देख कर कहा, ‘सर मैं इस व्यवहार का आदी नहीं हूँ।’

यशवंत सिन्हा आगे बताते हैं, ‘मुख्यमंत्री मुझे दूसरे कमरे में ले गए और स्थानीय एसपी और डीआईजी के सामने मुझसे कहा कि मुझे इस तरह बर्ताव नहीं करना चाहिए था।’ मैंने कहा, ‘मैं शरीफ़ आदमी हूँ और चाहता हूँ कि मुझसे शराफ़त से पेश आया जाए। जहाँ तक दूसरी नौकरी ढूंढने की बात है, मैं एक दिन मुख्यमंत्री बन सकता हूँ, लेकिन आप कभी आईएस अफ़सर नहीं बन सकते। मैंने अपने कागज़ उठाए और कमरे से बाहर निकल आया।’

चंद्रशेखर के कार्यकाल में वित्त मंत्री

यशवंत सिन्हा ने अपनी किताब में लिखा है कि तब सुब्रमण्यन स्वामी वित्त मंत्री बनना चाहते थे, लेकिन कई लोग उनके ख़िलाफ़ थे। सिन्हा ने लिखा है कि स्वामी को मनाने के लिए तब वाणिज्य के साथ क़ानून-न्याय जैसे दो-दो मंत्रालय उन्हें दिए गए थे।

सिन्हा ने लिखा है कि वो ख़ुद भी वित्त मंत्री नहीं बनना चाहते थे। उनका मन विदेश मंत्री बनने का था, लेकिन चंद्रशेखर चाहते थे कि देश की अर्थव्यवस्था जिस संकट में है, यशवंत सिन्हा ही निकाल सकते हैं।

हालांकि चंद्रशेखर की सरकार एक साल भी नहीं रही और फिर इस आर्थिक संकट से पीवी नरसिम्हा राव और उनके वित्त मंत्री मनमोहन सिंह को जूझना पड़ा। जब अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में केंद्र में 1998 में सरकार बनी तो एक बार फिर से यशवंत सिन्हा वित्त मंत्री बने।

यह सरकार भी 13 महीने तक ही चली। 1999 में फिर से वाजपेयी की वापसी हुई और यशवंत सिन्हा को वित्त मंत्रालय मिला।

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