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बंगाल चुनाव में 100 से ज्यादा से सीटों पर त्रिकोणात्मक लड़ाई, मुस्लिम वोटर होंगे निर्णयाक भूमिका …

Bengal Election 2021: पश्चिम बंगाल में चुनाव की तारीखें जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, सभी पार्टियां वोटरों को रिझाने के लिए नए नए-हथकंडे अपना रही है। वहीँ भारत में चुनाव की बात की जाए तो बीजेपी को छोड़ कर सभी राजनीतिक पार्टियों का ध्यान मुस्लिम वोटरों पर केंद्रित रहता हैं। माना जा रहा है कि विधानसभा चुनाव में मुस्लिम मतदाता अहम् भूमिका निभा सकते है।

राज्य में करीब 30 फीसद मुस्लिम आबादी है। मुस्लिम समुदाय का 100 से 125 विधानसभा सीटों पर सीधा प्रभाव है, जहां वे जीत-हार तय करते हैं। इनमें से करीब 90 सीटों पर पिछले विधानसभा चुनाव में सत्तारुढ़ तृणमूल कांग्रेस को जीत मिली थी, लेकिन इस बार भाजपातृणमूल के साथ मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने और मुस्लिम वोटरों को वापस अपने साथ लाने के लिए वाममोर्चा और कांग्रेस ने फुरफुरा शरीफ दरगाह के पीरजादा और प्रमुख मुस्लिम धार्मिक नेता अब्बास सिद्दीकी की कट्टपंथी पार्टी इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आइएसएफ) के साथ गठजोड़ किया है, जिसके बाद समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं।

पीरजादा का इतने मतदाताओं पर है प्रभाव 

पश्चिम बंगाल में जहां तक फुरफुरा शरीफ के पीरजादा की बात है, तो 12 से 15 लाख बांग्लाभाषी मुस्लिम परिवारों पर इनका प्रभाव माना जाता है। अब्बास सिद्दीकी के प्रति खासकर मुस्लिम युवाओं का रुझान अधिक है, जो तृणमूल के लिए चिंता का सबब है।

किस सीट पर कितना मुस्लिम मतदाताओं का प्रभाव

पश्चिम बंगाल में कुल 294 विधानसभा क्षेत्र हैं, जिनमें से 46 में मुस्लिमों की संख्या 50 फीसद से अधिक है। 16 सीटें ऐसी हैं, जहां मुसलमानों की आबादी 40 फीसद से अधिक, 33 सीटों पर 30 फीसद से अधिक और 50 सीटों पर 25 फीसद से अधिक हैं। उत्तर व दक्षिण 24 परगना, मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तर व दक्षिण दिनाजपुर, नदिया और बीरभूम जिलों में मुस्लिम वोटों को ध्यान में रखकर ही उम्मीदवार तय किए जाते रहे हैं।

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