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अबकी ‘नारियल नहीं आसमान’ गिरा हैं, राहुल गाँधी और बाकी विपक्ष क्या कर रही हैं?

भारतीय राजनीति में राहुल गांधी को हमेशा कमजोर माना गया है। हर समय हर कोई कांग्रेस नेता के बारे मे कुछ भी कह के अपना फ्रस्ट्रेशन उतार लेता है। यहाँ तक कि बीजेपी से नाराज चल रहा एक बड़ा तबका भी राहुल गाँधी को अपना नेता मानने से इंकार करता हैं। आप सब ने सोच ही लिया होगा कि देश की जनता इस मासूम चेहरे से सौतेला व्यवहार क्यों करता हैं।

हालांकि कांग्रेसी समर्थक अपना पाला झाड़ते हुए कहते हैं कि यह सब बीजेपी की चाल है। वह जान बूझकर अपने आईटी सेल के द्वारा राहुल गाँधी के खिलाफ प्रोपेगेंडा खड़ा करती है। बीजेपी के पास और कोई टॉपिक ही नहीं बचा बस हमारे नेता के बारे में अनाब-सनाब फैलाते रहते हैं।

हाँ यह सच है कि बीजेपी इनके खिलाफ 100 झूठ बोलकर एक महत्वपूर्ण सच बना देती है। जैसे आलू से सोना निकालने वाली बात जो बिलकुल पब्लिक डोमेन में फैलाई गई हैं।

लेकिन क्या राहुल गांधी को देखने के बाद अपने घर का वह छोटा सा बच्चा याद नहीं आता जिसको पहले से ही सीखा दिया जाता हैं कि गेस्ट के आने पर तुम्हे कितना मुंह खोलना हैं। और उनको कैसे ‘मछली जल की रानी’ वाली कविता सुनाकर इम्प्रेस करना हैं।

बाकी विपक्ष के नेताओं की स्थिति भी ऎसी है

जब अखबारों में पढ़ता हूँ, यह भारतीय इतिहास का सबसे कमजोर विपक्ष हैं तो मुझे ग्लानि महसूस होती है क्योंकि भारत का विपक्ष कमजोर नहीं हैं, विपक्ष में बैठे नेता कमजोर हैं। इन नेताओं के पास सत्ता की भूख तो हैं, लेकिन इनकी हालत जंगल में बैठे बीमार बूढ़े शेरों की तरह हो गई हैं। इनसे खुद खड़ा नहीं हुआ जा रहा, ताकि वह अपना शिकार कर भूख मिटा सकें। और राहुल गाँधी की बात करें तो इनकी हालत इस जंगल की खरगोश जैसी हो गई हैं, जो मामूली सा नारियल गिरने पर सदमे से उठते हुए कहता है कि ‘आसमान गिरा’… फिर जंगल के सारे विपक्ष जमा हो जाते हैं।

आखिरकार सत्ता में बैठा हुआ शेर अपनी सिंहासन से उठकर आता है और विपक्ष में बैठे तमाम जानवरों का मखौल उड़ाते हुए समस्या का सामाधान निकाल देता हैं।

मैं यह कहानी इसलिए सूना रहा था कि देश के विपक्ष को जब भी लड़ाई लड़नी होती है, तो इन्ही नारियल गिरने जैसी मुद्दों पर शोर शराबा करने लगते हैं। लेकिन सच में उन्हें गिरा हुआ आसमान दिखाई नहीं देता हैं। इसलिए विपक्ष को सोचना होगा कि ‘किसान आंदोलन’ आसमान गिरने जैसा और बिजली कड़कने जैसी हैं। अब विपक्ष को जितनी जल्दी हो सके आसमान को उठाने का दायित्य अपने कंधो पर लेना होगा।

सचिन सार्थक

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