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दशकों से ऐसा नहीं हुआ हैं, लेकिन क्या पिनाराई विजयन लगातार दूसरी जीत दर्ज कर इतिहास बनाएंगे

पिनाराई विजयन

जिस तरह 2016 में जयललिता ने तमिलनाडु में लगातार दूसरी बार सत्ता में वापसी की थी, ठीक वैसा ही रिकॉर्ड बनाने की बात मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के बारे में की जा रही है। कहा जाता हैं, और देखा भी गया है कि साउथ के कुछ राज्यों में, जनता दशकों से किसी भी एक पार्टी को दोबारा सत्ता देने से परहेज करती हैं।

अगर एक चुनाव में सीपीएम के नेतृत्व वाले लेफ़्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट की जीत होती है, तो अगले में कांग्रेस के अगुआई वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट की जीत होती रही है।

स्थानीय निकाय चुनाव जीतने से एलडीएफ का हौसला बढ़ा हैं

दिसंबर में हुए चुनाव में एलडीएफ़ ने 40.2 फ़ीसद वोट हासिल किए और अधिकांश स्थानीय निकायों पर उसका नियंत्रण रहा। यूडीएफ़ ने 37.9 फ़ीसद वोट हासिल किए जबकि बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए को 15 फ़ीसद वोट मिले।

राजनीतिक हलकों में यह माना जाता है कि स्थानीय निकाय चुनावों के परिणाम में एलडीएफ़ की जीत ने पार्टी को एक गति प्रदान की है, और इसका बखूबी साथ दिया कोविड-19 के शुरुआती महीनों के दौरान ज़मीनी स्तर के कार्यकर्ता का लोगों के बीच राशन और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में काम करना।

हालाँकि, परिणाम आने के दो महीने बाद भी काँग्रेस सदमे में है। आलाकमान ने तुरंत कार्रवाई की और पूर्व मुख्यमंत्री ओमन चांडी को सक्रिय भूमिका निभाने के लिए लाया गया। इसके बावजूद कम्युनिस्टों को अभी पूरा यक़ीन है कि उनकी सत्ता इस बार भी कायम रहेगी।

सीपीएम और एलडीएफ़ के संयोजक ए विजयराघवन ने बीबीसी हिंदी को बताया, ”इस बार हमारी पार्टी की सरकार के सत्ता में बने रहने की पूरी संभावना है। कोई सत्ता विरोधी लहर नहीं है। स्थानीय निकाय के चुनाव नतीजे भी यही संकेत दे रहे हैं।”

क्या कहते हैं लेफ्ट नेता

पूर्व सांसद एमपी राजेश ने बीबीसी हिंदी से कहा, ”इस विश्वास के पीछे कारण है सरकार का अब तक का प्रदर्शन। कोरोना वायरस महामारी होने के बावजूद पेंशन योजना में दायरे में 60 लाख लोगों को लाया गया और राशन किट 88 लाख लोगों के घरों तक पहुँचाए गए। कोविड-19 के रोगियों का इलाज अब भी मुफ़्त हो रहा है और हमारे सरकारी अस्पतालों इसके इलाज की कहीं बेहतर व्यवस्था है।’

सीपीएम नेताओं का कहना है कि केंद्रीय एजेंसियों के सोने की तस्करी के रैकेट के बारे में जो हो-हल्ला मचाया या राज्य पार्टी के सचिव कोडिएरी बालकृष्ण के बेटे की मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कथित संलिप्तता पर जो राजनीति की गई, उसने चुनाव में कुछ ज़्यादा असर नहीं डाला।

क्या कहते है राजनीतिक विश्लेषक

जाने माने राजनीतिक टीकाकार बीआरपी भास्कर ने बीबीसी हिंदी को बताया, “इसमें कोई संदेह नहीं है कि विजयन की एक सफल मुख्यमंत्री की छवि है। शायद, पिछली एलडीएफ़ सरकारों की तुलना में सबसे अच्छी। उनके संवाद कौशल अच्छे हैं और एक संकटकालीन स्थिति में उनकी रोज़ाना ब्रीफिंग ने अच्छा प्रभाव डाला है।”

राजनीतिक जानकार जोसेफ मैथ्यू बीबीसी हिंदी से कहते हैं, ”यह जीत तक ले जा सकती है या नहीं, यह कहना जल्दबाज़ी होगी। जो तय है वो ये कि यह दोतरफ़ा नहीं होगा. बीजेपी बहुत अधिक सीटें नहीं जीत सकती है, लेकिन वे कम से कम दो दर्जन निर्वाचन क्षेत्रों में अन्य पार्टियों की रणनीति को बिगाड़ सकते हैं।’और इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हस्तक्षेप से, कम-से-कम अब तक, मदद मिलने की संभावना नहीं लगती। लेकिन, इससे बीजेपी को ईसाइयों के कुछ वोट मिलने की संभावना से भी कोई इनकार नहीं कर सकता।

सीपीएम राज्य सचिवालय सदस्य पी राजीव ने बीबीसी हिंदी से कहा, ”यह मुख्य मुद्दा नहीं है। हम सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के दायरे में ही आम सहमति लाने का प्रयास कर रहे हैं। प्रभावकारी व्यवस्था तय की जाएगी। फ़िलहाल, यह प्रक्रिया चल रही है।”

यह स्थापित तथ्य है कि केरल में एलडीएफ़ और यूडीएफ़ दोनों की अच्छी ख़ासी पकड़ है। यह भी सर्वविदित है कि केरल के दक्षिण और मध्य ज़िलों में मतदाताओं का एक छोटा वर्ग इन दोनों में से किसी न किसी एक पार्ट को मजबूत स्थिति प्रदान करता है।

भास्कर कहते हैं, “फिलहाल, आप किसी एक पार्टी को ख़ारिज नहीं कर सकते। यह बेहद क़रीबी चुनाव हो सकता है।”

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