Delhi

किस बात का जश्न है? राफेल आया है, कोरोना वैक्सीन नहीं

फ्रांस से पांच राफेल युद्ध विमान आज भारत आ गये. यकीनन इनके आने से भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ी है. इसलिए देश भर में इन राफेल विमानों के आने का जम कर स्वागत किया जा रहा है. न्यूज चैनलों से तो जैसे कोरोना महामारी गायब हो गई है. सिर्फ राफेल के चर्चे हैं. बताया जा रहा है कि इन पांच राफेल के आने से चीन और पाकिस्तान के होश उड़े गये हैं.

जिस तरह से राफेल के आने का मीडिया में डंका पीटा जा रहा है और सोशल मीडिया में प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार की जयजयकार की जा रही है. उसे देख कर तो लग रहा है कि राफेल विमान से अब कोरोना का इलाज भी हो जायेगा. हकीकत तो ये है कि राफेल के नाम पर लोगों की देशभक्ति की भावना को भड़का कर कोरोना संकट से लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है.

जिस तरह से राफेल की जयजयकार की जा रही है, ऐसा लग रहा है कि राफेल नहीं, बल्कि कोरोना वायरस का वैक्सीन (टीका) आ गया है. इस वक्त हमें किसी हथियार या जंगी जहाज से ज्यादा कोरोना के टीके और रोजगार की जरूरत है. सरकार खुद स्वीकार कर रही है कि कोरोना भारतीय इतिहास का सबसे बड़ा संकट है. सरकार के मुताबिक कोरोना और लॉकडाउन के चलते कई करोड़ लोगों का रोजगार चला गया है. ऐसे लोगों को राफेल नहीं, रोजगार की जरूरत है.

लेकिन रोजगार की बात ही नहीं हो रही है. देश ने कोरोना के मामलों में 15 लाख का आंकड़ा पार कर लिया है. उसकी कोई चर्चा नहीं है. सिर्फ राम मंदिर और राफेल की चर्चा है. ऐसा लग रहा है कि राफेल के आने और राम मंदिर का निर्माण हो जाने से देश की सभी समस्या का समाधान हो जायेगा. गंभीर बात ये है कि जिन लोगों ने अपना रोजगार खोया है. या जो युवा रोजगार की तलाश में भटक रहे हैं. उन्हें भी इसकी कोई चिंता नहीं है. वो भी मोदी सरकार और गोदी मीडिया द्वारा परोसे जा रहे नशे में मदमस्त हैं.

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