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तो पांच राज्यों के चुनाव रिजल्ट आते ही खत्म हो जाएगा किसान आंदोलन?

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भारतीय इतिहास में किसान आंदोलन की संस्कृति बहुत समय से चली आ रही है। पहले अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों के कारण हमारे अन्नदाता पिसते थे और आज शायद हमारे देश की राजनीति की चक्की में पिस रहे हैं। जिस तरह पार्टियां किसानों की हितैषी बनने का दावा करती नजर आ रही उससे साफ साफ लगता है कि ये हित बस चुनावी रोटी सेकने के लिए प्रेम स्वरूप नेताओं के दिलों में एकाएक उमड़ रहा है।

पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी समेत देश के चार राज्‍यों और एक केंद्रशासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी बवाल मचा हुआ है। इन सब में पश्चिम बंगाल काफी चर्चाओं में हैं और खूब सुर्खिया बटोर रहा है।

बता दें कि अब इस चुनाव को किसान आंदोलन से जोड़कर देखा जाने लगा है। इसकी सबसे बड़ी वजह है कि किसान नेता राकेश टिकैत पश्चिम बंगाल में महापंचायत कर रहे हैं, जिससे लोगों को और बल मिला गया है।

खैर हमारे अन्नदाता इतने भोले भी नहीं ये बात केंद्र सरकार अच्छे जान रही है। तभी तो अपने बनाए कानूनों के प्रति किसानों को रिझा नहीं पा रही। उधर किसानों के मसीहा बने राकेश टिकैत का बयान चुनावी हवन में दिन-प्रतिदिन घी का काम कर रहा है। एक ओर जहाँ दिल्ली से जुड़े अलग-अलग बॉर्डर पर गर्मी को देखते हुए किसान पक्के मकान बनाने में जुटे हैं वहीं दूसरी ओर सरकार का पूरा ध्यान चुनाव पर हीं केंद्रित नजर आ रहा। अब देखना यह है कि इन पाँच राज्यों के चुनाव के बाद भी किसानों पर सरकार की कृपादृष्टि बनेगी या नहीं।

पिछले साल जब दिल्ली की दहलीज पर शाहीनबाग पल रहा था और देश की राजधानी नफ़रत की आग में जल रही थी। वहीँ चारो तरफ से यहीं खबरे आ रही थी कि यह आंदोलन चुनाव को देखते हुए राजनीतिक पार्टियों ने अपने बल पर खड़ा की है और कयास लगाया जाने लगा कि दिल्ली विधानसभा चुनाव ख़त्म होते ही आंदोलन ठन्डे बस्तें में चली जाएगी। लेकिन कुछ ऐसा ही घटा।

दिल्ली चुनाव का रिजल्ट आते कोरोनावायरस का हवाला देकर पुलिस प्रशासन द्वारा दिसंबर 2019 से चले आ रहे हैं शाहीन बाग विरोध को मार्च 2020 में शांतिपूर्वक खत्म कर दिया गया। अनुमानित है कि जिस तरह शाहीन बाग विरोध का इस्तेमाल दिल्ली चुनाव के लिए किया गया, कहीं उसी तरह किसान आंदोलन का इस्तेमाल बंगाल चुनाव के लिए तो नहीं किया जा रहा है और इसके बाद इसको भी कोरोना के बढ़ते मामलों का हवाला देकर सरकार के आदेशानुसार शांतिपूर्वक ढंग से खत्म न करा दिया जाए।

पल्लवी सिंह

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