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तो इस लिए बंगाल चुनाव में राहुल गांधी ने देर से मारी एंट्री

दलित

पश्चिम बंगाल में चार चरणों के चुनाव ख़त्म हो गए हैं, इस दौरान बंगाल की राजनीति में उठा पठक जारी हैं। बीतें चार चरणों के चुनाव प्रचार-प्रसार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह, ममता बनर्जी जैसे तमाम धुरंधर टाइमलाइन में बने हुए थे या अभी भी बने हुए हैं। लेकिन इन सब के बीच राहुल गांधी कहीं नहीं दिख रहे थे। क्या उन्हें किसी ज्योतिष ने पश्चिम बंगाल में प्रचार करने के लिए मना किया था, या किसी मुहर्त के तलाश में थे।
आइए जानते है आखिर क्या थी वजह की उन्होंने कोई चुनावी सभाएं नहीं की, अब इसे सीधे पांचवे चरण में एंट्री मारी हैं।

दो नावों पर सवार कांग्रेस असमंजस के भंवर में फंसी रही। उसने फैसले भी अजब-गजब लिये। कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल में वाममोर्चा से गठबंधन कर लिया जब कि केरल में वह इसके खिलाफ मैदान में थी। केरल में कांग्रेस को लगा कि वह सत्ता में लौट सकती है। इसलिए सारा ध्यान वहीं लगाया। राहुल गांधी ने सीपीएम के नेतृत्व वाली विजयन सरकार के खिलाफ जम कर हमला बोला। केरल में कांग्रेस और वाममोर्चा के बीच आमने सामने की लड़ाई थी।

राहुल गांधी संभावित जीत को देखते हुए कोई जोखिम नहीं लेना चाहते थे। अगर केरल चुनाव (6 अप्रैल) के दरम्यान राहुल या प्रियंका गांधी पश्चिम बंगाल जाते तो उन्हें चुनाव प्रचार के दौरान कम्यूनिस्ट नेताओं के साथ मंच साझा करना पड़ता। राहुल गांधी को किसी कम्यूनिस्ट उम्मीदवार के लिए वोट भी मांगना पड़ता। इससे कांग्रेस के लिए केरल में शर्मनाक स्थिति हो जाती। कांग्रेस समर्थकों में भ्रम पैदा हो जाता। केरल की कम्यूनिस्ट सरकार राहुल गांधी का मजाक उड़ा सकती थी। इस बात से बचने के लिए राहुल गांधी ने पश्चिम बंगाल नहीं जाना ही मुनासिब समझा। केरल के लिए पश्चिम बंगाल के हितों की कुर्बानी दे दी। प्रियंका और सोनिया गांधी के भी नहीं आने की यही वजह थी।

राहुल गांधी 14 अप्रैल को उत्तर दिनाजपुर के गोआल पोखर में चुनावी सभा करेंगे। उत्तर दिनाजपुर की 9 सीटों पर छठे चरण के तहत 22 अप्रैल को चुनाव है। 2016 के चुनाव में इस जिले की 9 सीटों में से कांग्रेस को केवल एक सीट मिली थी। गोआल पोखर तृणमूल कांग्रेस की सीट है। लेकिन राहुल गांधी की पहली चुनावी सभा रायगंज की बजाय गोआल पोखर में हो रही है। राहुल, प्रियंका और सोनिया गांधी की गैरमौजूदगी में कांग्रेस की पतवार अधीर रंजन चौधरी ने थाम रखी है। अधीर रंजन लोकसभा में कांग्रेस संसदीय दल के नेता हैं और पश्चिम बंगाल के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भी हैं। इस दो बड़े दायित्वों से कांग्रेस में उनकी अहमियत समझी जा सकती है।

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