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मध्य प्रदेश और कर्नाटक की तरह राजस्थान में BJP के लिए राह नहीं आसान, लेकिन मायावती जरूर खुश होंगी.

राजस्थान में अशोक गहलोत की अगुवाई में चल रही कांग्रेस की सरकार अपने ही उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट की वजह से संकट में दिखाई दे रही है. मध्य प्रदेश के नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया की तरह सचिन पायलट ने बगावत कर दी है और उनकी ओर से दावा किया जा रहा है कि उनके समर्थन में 30 विधायक हैं और उन्होंने साफ ऐलान कर दिया है कि आज होने वाली कैबिनेट की बैठक में वह हिस्सा नहीं लेंगे. दरअसल राजस्थान में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद से ही सचिन पायलट के मन में एक तरह से कुलबुलाहट चल रही थी जो बीच-बीच में सबके सामने भी आई. एक समय खुद को राजस्थान के सीएम पद के लिए खुद को प्रबल दावेदार मान रहे सचिन पायलट को कांग्रेस आलाकमान ने झटका देते हुए अशोक गहलोत को सीएम बना दिया. बात यहीं से बिगड़ने शुरू हो गई.

हाल में विधायकों को लालच देकर तोड़ने की बातें सामने आने के बाद सीएम अशोक गहलोत ने जांच के लिए एसओजी का गठन किया था. 10 जुलाई को इस जांच समिति ने सचिन पायलट को समन भेज कर पूछताछ के लिए बुला लिया. उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के लिए यह एक तरह से अपमान की बात थी. हालांकि बाद में अशोक गहलोत को भी समन भेजा गया. हालांकि तब तक मामला पूरी तरह से हाथ निकल गया. सचिन पायलट दिल्ली आ गए और उन्होंने कांग्रेस आलाकमान से मिलकर मामले को निपटाने की ठान ली है.

बीजेपी फूंक-फूंर रख ही है कदम

रविवार को सूत्रों ने बताया कि सचिन पायलट लगातार बीजेपी नेताओं के संपर्क में है. साथ ही सचिन पायलट ने सीएम बनने की इच्छा उनसे जता दी है. लेकिन बीजेपी ने ऐसा आश्वासन देने से इनकार कर दिया. बीजेपी की ओर से पहले सचिन पायलट से कहा गया है कि पहले वो सरकार गिराएं. आज फिर सूत्रों का कहना है कि बीजेपी के लिए गहलोत सरकार गिराना आसान नहीं है. बीजेपी और कांग्रेस की सीटों में काफी अंतर है. कम से कम कांग्रेस के तीस विधायक इस्तीफा दें तभी राजस्थान सरकार गिर सकती है.

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