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राजस्थान में CM अशोक गहलोत की बात आखिरकार गवर्नर कलराज मिश्र मान गए…

राजस्थान की राजनीति में जमकर उठा-पटक मची हुई है. सीएम गहलोत पिछले कई दिनों से चाह रहे थे कि विधानसभा सत्र बुलाया जाए, लेकिन राज्यपाल कलराज मिश्र की तरफ से मंज़ूरी नहीं मिल रही थी. लेकिन आखिरकार 29 जुलाई की शाम को परमिशन मिल गई. राज्यपाल ने विधानसभा सत्र को 14 अगस्त से शुरू करने की मंज़ूरी दे दी है. इसके अलावा इस सत्र के दौरान कोरोना से बचने के लिए सभी ज़रूरी इंतज़ाम करने के भी मौखिक तौर पर निर्देश दिए हैं.

राज्यपाल ने सेशन बुलाने में हुई देरी के पीछे स्टेट कैबिनेट को ही वजह बताया है. उनका कहना है कि कैबिनेट महामारी के दौर में इतने शॉर्ट नोटिस पर मॉनसून सेशन क्यों बुलाना चाहती है, इसका कारण स्पष्ट नहीं किया था. 29 जुलाई की सुबह गवर्नर ने तीसरी बार इस प्रपोज़ल को मना कर दिया था. गवर्नर का कहना था कि सत्र बुलाने से पहले 21 दिन का नोटिस दिया जाए या फिर अर्जेंट नोटिस पर सत्र बुलाने की वजह को स्पष्ट किया जाए.

राजस्थान कैबिनेट ने 23 जुलाई के बाद से गवर्नर को तीन बार सत्र बुलाने के प्रपोज़ल भेजे. तीनों बार न में जवाब मिला था. उसके बाद कैबिनेट ने 21 दिन पहले नोटिस भेजने वाले निर्देश पर काम किया. और एक नया प्रपोज़ल राज्यपाल को भेजा. राजस्थान के कानून और संसदीय मामलों के मंत्री शांति कुमार धारीवाल ने बताया कि 14 अगस्त की तारीख को इसलिए चुना गया, क्योंकि कैबिनेट ने सत्र बुलाने के लिए पहला प्रपोज़ल गवर्नर को 23 जुलाई के दिन भेजा था, और तब से 14 अगस्त तक 21 दिन होते हैं.

29 जुलाई की सुबह जब तीसरी बार प्रपोज़ल वापस आया था, तब सीएम गहलोत पार्टी नेताओं और विधायकों से पार्टी ऑफिस में एक सेरेमनी के दौरान मिले. यहां गोविंद सिंह डोटासरा ने औपचारिक तौर पर कांग्रेस के स्टेट प्रेसिडेंट का चार्ज संभाला. सेरेमनी में गहलोत ने कहा था,

“आज फिर हमें कहा गया कि हम 21 दिन में इसे (सत्र) बुला सकते हैं. लव लेटर आ गया है और अब मैं उनके (गवर्नर) साथ चाय पीने जा रहा हूं. कि भाई आपने प्रेम पत्र तीसरी बार भेज दिया. आप चाहते क्या हैं?”

इस सेरेमनी के बाद गहलोत राजभवन गए. फिर कैबिनेट मीटिंग की. स्पीकर सी.पी. जोशी ने भी गवर्नर से मुलाकात की.


इतने दिनों से हो क्या रहा था?

सीएम गहलोत असेंबली सेशन बुलाना चाहते थे. उनका कहना था कि इसमें कोरोना को लेकर चर्चा की जाएगी. हालांकि अटकलें यह हैं कि गहलोत इस सेशन के जरिए बहुमत परीक्षण कराना चाहते हैं. वहीं राज्यपाल कलराज मिश्र का कहना था कि विधानसभा सत्र बुलाने के लिए 21 दिन पहले नोटिस देना होता है. अगर कुछ विशेष हालात हैं, तो अलग बात है. इसका जिक्र कैबिनेट को करना चाहिए. मामला यहीं पर अटका हुआ था. गहलोत सामान्य चर्चा के लिए 31 जुलाई से विधानसभा सत्र बुलाने की मांग पर अड़े थे और कलराज मिश्र 21 दिन के नोटिस पर. वो कोरोना काल का भी जिक्र कर रहे थे. हालांकि अब सत्र को लेकर हालात साफ होते दिख रहे हैं. विधानसभा में कोरोना पर चर्चा होगी, या बहुमत परीक्षण, ये 14 अगस्त को देखेंगे.

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