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पंचायत चुनाव: यूपी के इस जिलें में नए आरक्षण लिस्ट के बावजूद नहीं हुआ बदलाव

हाईकोर्ट के आदेश के बाद त्रिस्तरीय पंचायत में विभिन्न पदों पर आरक्षण व्यवस्था नए सिरे से लागू करने को शासन ने बुधवार देर रात गाइडलाइन जारी की है। नई व्यवस्था में जिला पंचायत अध्यक्ष पद ओबीसी के लिए आरक्षित हुआ है। बीते दिनों भी इस पद के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग को ही आरक्षित किया गया था। वर्ष 2015 में यह पद अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित किया गया था।

मुजफ्फरनगर जिला पंचायत अध्यक्ष पद पिछले चुनाव में अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित किया गया था 2015 में हुए चुनाव में समाजवादी पार्टी की सरकार होने के बावजूद केंद्रीय राज्य मंत्री संजीव बालियान में भाजपा समर्थक आंचल तोमर को जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर विजयी बनाने में सफलता प्राप्त की थी।

इस बार शासन में जिला पंचायत अध्यक्ष का पद ओबीसी के लिए आरक्षित कर दिया था शासन द्वारा घोषित आरक्षण प्रक्रिया पर हाईकोर्ट ने रोक लगाते हुए 2015 को आधार मानकर नए सिरे से आरक्षण की घोषणा करने के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में बुधवार देर शाम घोषित जिला पंचायत अध्यक्ष पद के आरक्षण सूची में मुजफ्फरनगर का जिला पंचायत अध्यक्ष पद ओबीसी के लिए ही आरक्षित रहा है इससे उन दावेदारों के चेहरे खिल गए हैं जो हाई कोर्ट द्वारा नए सिरे से आरक्षण प्रक्रिया जारी करने के आदेश के बाद से मायूस हो गए थे।

सामान्य वर्ग के कई दावेदार जिसमें भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेता और जिले के प्रमुख पदाधिकारी भी शामिल हैं उन्हें आशा थी कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद जारी आरक्षण सूची में मुजफ्फरनगर जिला पंचायत अध्यक्ष पद अनारक्षित हो सकता है जिससे वह भी दावेदार बन जाएंगे लेकिन ऐसे सभी नेताओं को शासन द्वारा घोषित आरक्षण सूची से निराशा ही मिली। शामली जिला पंचायत अध्यक्ष का पद भी अनुसूचित जाति की महिला के लिए ही पहले घोषित आरक्षण सूची की तरह बिना किसी बदलाव के आरक्षित रहा।

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