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लव-कुश के सहारे नीतीश कुमार, क्या बचा पाएंगे अपनी राजनीतिक साख

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पिछली विधानसभा में खिसकी अपनी जमीन को मजबूत करने में लग गए हैं। इसके लिए वो अपनी पुरानी लव-कुश समीकरण को साधने की कोशिश कर रहे हैं।

नीतीश की पार्टी ने कुशवाहा समाज से ताल्लुक रखने वाले आरएलएसपी के बड़े नेता उमेश कुशवाहा को सबसे पहले अपने पार्टी में शामिल किया। उसके बाद आरएलएसपी के संस्थापक उपेंद्र कुशवाहा अपनी पूरी टीम के साथ शामिल हो गए। लेकिन अब जेडीयू की नजर कुशवाहा समाज के एक और सबसे बड़े नेता भगवान सिंह कुशवाहा पर है। जिनको अपने पार्टी में शामिल करने की कवायद जेडीयू ने शुरू कर दी है। ताकि जेडीयू का जनआधार मजबूत हो सके।

दरअसल, पिछले विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार के पार्टी तीसरे नंबर पर रही थी। हालांकि, एनडीए गठबंधन के वादे के अनुसार मुख्यमंत्री नीतीश तो बन गए। लेकिन ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं, उस गठबंधन में उनकी हैसियत में थोड़ी सी कमी आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उपेंद्र कुशवाहा और भगवान सिंह कुशवाहा के शामिल होने से कुशवाहा समाज का समर्थन मिलेगा। जो आने वाले चुनाव में जेडीयू को फायदा पहुंचा सकता है।

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