Bhopal

MP Politics: मप्र में कहीं भारी न पड़ जाए भाजपा को अपनों की नाराजगी

भोपाल। मध्य प्रदेश में सरकार गंवाने के बाद से ही बैकफुट पर चल रही कांग्रेस एक बार फिर मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर राज्य की भाजपा सरकार के अस्थिर होने की भविष्यवाणी करने लगी है। मंत्री पद की दौड़ में शामिल कई वरिष्ठ भाजपा विधायकों की पेशबंदी तेज हो गई है और मौका न मिलने पर उनकी नाराजगी बढ़ सकती है। दूसरी तरफ उपचुनाव में टिकट के दावेदारों के भी विरोधी सुर सुनाई पड़ने लगे हैं। ऐसे में सरकार के स्थायित्व को लेकर जूझ रही भाजपा को अपनों की नाराजगी कहीं भारी न पड़ जाए। कांग्रेस सरकार के पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने सोमवार को दावा किया कि मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भाजपा में कलह बढ़ गई है।

यह सही है कि मंत्री पद की दौड़ में शामिल कई विधायकों का दबाव बढ़ा है। इधर, ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ कांग्रेस छोड़कर आने वालों को मौका देने का संकल्प भी भाजपा को निभाना है। दूसरी तरफ 2018 में भाजपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ चुके कई दिग्गज नेता अपने हाथ से थाली खिसकती देख नाराज दिखने लगे हैं। उनकी नाराजगी जगजाहिर होने लगी है।

कैलाश विजयवर्गीय के खिलाफ मोर्चा

ताजा मोर्चा इंदौर निवासी बदनावर के पूर्व विधायक भंवर सिंह शेखावत ने खोला है। वर्ष 2018 के चुनाव में बदनावर में भाजपा उम्मीदवार भंवर सिंह शेखावत कांग्रेस के राज्यव‌र्द्धन सिंह से करीब 41 हजार मतों से चुनाव हार गए थे। उनकी हार की सबसे बड़ी वजह यह हुई कि भाजपा के ही राजेश अग्रवाल ने विद्रोह कर निर्दलीय ताल ठोंक दी और राजेश को भी 30 हजार से अधिक मत मिले थे। अब राज्यव‌र्द्धन कांग्रेस से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो गए हैं और राजेश अग्रवाल की भी वापसी हो गई है। जाहिर है कि राज्यव‌र्द्धन भाजपा के उम्मीदवार होंगे और राजेश अग्रवाल को भी महत्व मिलेगा। इससे खफा शेखावत ने भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। पूर्व विधायक शेखावत की नाराजगी से कोई नया गुल खिल सकता है।

दीपक जोशी और शेजवार पहले ही गर्मा चुके माहौल

मप्र के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. कैलाश जोशी के पुत्र और पूर्व मंत्री दीपक जोशी पिछली बार देवास जिले के हाटपीपल्या में कांग्रेस के मनोज चौधरी से करीब 13 हजार मतों से हार गए थे। अब चौधरी भाजपा में हैं और उनकी चुनावी तैयारी भी चल रही है। इस बीच दीपक जोशी कई बार अपने तेवर दिखा चुके हैं। इधर,रायसेन के सांची में मुदित शेजवार भी इशारों में अपनी पीड़ा जाहिर कर चुके हैं। 2018 में सांची में कांग्रेस के प्रभुराम चौधरी ने भाजपा उम्मीदवार मुदित को करीब दस हजार मतों के अंतर से हराया था।

प्रभुराम को कमल नाथ सरकार में मंत्री बनाया गया, लेकिन शिवराज की सरकार बनाने के लिए वह मंत्री और विधायकी कुर्बान कर भाजपा में शामिल हुए। अब उनका टिकट पक्का है। ऐसे में भाजपा के प्रभावशाली अनुसूचित नेता गौरीशंकर शेजवार के पुत्र मुदित की नाराजगी भी मायने रखती है, इसीलिए इन्हें मनाने शिवराज सिंह चौहान भी सांची गए थे। ऐसे ही ग्वालियर में जयभान सिंह पवैया समेत कुछ और नाम हैं, जिनकी चुप्पी बनी है, लेकिन यह तूफान आने के पहले की खाामोशी बताई जा रही है।

कई बार राजनीतिक स्थिति बदलती है तो कार्यकर्ता विचलित हो जाते हैं। भाजपा की पूरी कोशिश है कि बदली स्थिति में कार्यकर्ता को समझाया जाए। मप्र के व्यापक हित में कार्यकर्ताओं को भी त्याग की जरूरत है।

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