Bhopal

मध्य प्रदेश में सत्ता की चाबी हथियाने के लिए एक दर्जन सीटों पर ताकत झोंकेगी बसपा।

Mayawati

भोपाल, । मध्य प्रदेश में 24 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव को लेकर बसपा की उम्मीदें परवान चढ़ चुकी हैं। सत्ता की चाबी हथियाने के लिए उसने ग्वालियर-चंबल संभाग की 16 में से 12 सीटों पर पूरा जोर लगाने की रणनीति बनाई है। बसपा पूर्व में इनमें से ज्यादातर सीटों पर काबिज रह चुकी है। पार्टी सुप्रीमो मायावती ने प्रदेश इकाई को जिताऊ उम्मीदवारों को ढूंढने का टारगेट दिया है।

विधानसभा चुनाव में बसपा ने मात्र दो सीटें जीती थीं

डेढ़ साल पहले हुए मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान बसपा ने 228 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे, लेकिन उसे उम्मीदों के विपरीत मात्र दो सीटों (भिंड व पथरिया) पर सफलता मिली।

ग्वालियर-चंबल संभाग की 16 सीटों पर है बसपा का फोकस

अब प्रदेश में एक साथ 24 सीटों पर पहली बार उपचुनाव का मौका आया है, इनमें से 16 सीटें केवल ग्वालियर-चंबल संभाग की हैं। यह इलाका बसपा के प्रभाव क्षेत्र का माना जाता है। 11 सीटों पर बसपा पूर्व में काबिज रह चुकी है, इसलिए अमूमन उपचुनाव से परहेज करने वाली बसपा को लगने लगा है कि यदि उसका दांव चल गया तो मप्र में वह ‘किंग मेकर’ की भूमिका में भी आ सकती है।


बसपा को जिताऊ चेहरों की तलाश

बसपा इन सीटों पर सियासी, जातीय और क्षेत्रीय गणित के हिसाब से जिताऊ चेहरों को तलाशने में जुटी है। बसपा की नजर भाजपाकांग्रेस के दावेदार और असंतुष्टों पर भी है। भाजपा और कांग्रेस की तुलना में संसाधनों की कमी के बावजूद दो बार इन सीटों पर चुनावी सर्वे भी कराया गया है। अंबाह, भांडेर, मुरैना, मेहगांव, जौरा और पोहरी जैसी सीटों के लिए अलग तैयारी की गई है, क्योंकि यहां उसे ज्यादा संभावनाएं नजर आ रही हैं। पोहरी में बसपा 52 हजार वोट लेकर दूसरे स्थान पर थी।

हम जीतने के लिए लड़ेंगे : पिप्पल प्रदेश बसपा अध्यक्ष

रमाकांत पिप्पल का कहना है कि बसपा सुप्रीमो मायावती ने सभी सीटों पर तैयारी के साथ चुनाव मैदान में उतरने के निर्देश दिए हैं। ग्वालियर-चंबल संभाग की 11 सीटों पर अलग-अलग समय में बसपा काबिज रह चुकी है। ग्वालियर-चंबल संभाग की सभी 16 सीटों पर बसपा का जनाधार है, इसलिए हम जीतने के लिए ही चुनाव लड़ेंगे।

पिप्पल ने कहा- बसपा मप्र में किंग मेकर की भूमिका में आएगी

पिप्पल ने दावा किया कि बसपा को हम मप्र में किंग मेकर की भूमिका में लाएंगे। संख्या बल की लड़ाई ज्ञात हो, प्रदेश में तीन महीने पहले हुई सियासी उथल-पुथल में कांग्रेस के 22 विधायकों ने इस्तीफे दे दिए थे, जिससे कमल नाथ सरकार गिर गई। दो सीटें जौरा और आगर-मालवा विधायकों के निधन से रिक्त हुई हैं। इस तरह 24 सीटों पर उपचुनाव की स्थिति बन गई है।

विधानसभा में अभी भाजपा के पास 107 और कांग्रेस के 92 विधायक हैं

विधानसभा में अभी भाजपा के पास 107 और कांग्रेस के 92 विधायक हैं। इनके अलावा निर्दलीय चार, बसपा बहुजन समाज पार्टी के दो और समाजवादी पार्टी के एक विधायक हैं।

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