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नंदीग्राम संग्राम: राजा और वजीर की लड़ाई में कौन है फ़कीर लड़की मिनाक्षी मुखर्जी, जिसको लेफ्ट ने….

इस बार पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव का मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया। एक तरफ जहां राज्य की ममता बनर्जी ने तीसरी बार सत्ता में आने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। इन चुनावों में सबसे ज्यादा चर्चा में नंदीग्राम विधानसभा सीट है, जहां से सीएम ममता के सामने कभी उनके खास और सलाहकार रहे सुवेंदु अधिकारी सामने हैं। वहीं टीएमसी और बीजेपी का खेल बिगाड़ने के लिए माकापा से मीनाक्षी मुखर्जी चुनाव लड़ने जा रही हैं। जिसके चलते यहां टक्कर का मुकाबला देखने को मिल सकता है। आइए जानते है एक फ़कीर सी लड़की खुद को राजा और वजीर की लड़ाई में कहाँ देखती है…

मीनाक्षी माकपा के युवा संगठन भारतीय जनवादी नौजवान सभा (डीवाइएफआइ) की बंगाल प्रदेश अध्यक्ष है। बड़े चेहरों के साथ लड़ाई के सवाल पर मीनाक्षी ने कहा कि वे बेरोजगार करने वाले बड़े चेहरे हैं। लोकतंत्र की हत्या के लिए हिसा करने वाले बड़े चेहरे हैं। जिन्हें बड़ा चेहरा कह रहे हैं, वे चुनाव के बाद छोटे हो जाएंगे। दस साल पहले जो किसान वाम मोर्चा से नाराज थे, वही इस बार वाम मोर्चा को विजयी बनाएंगे।

विशेष बातचीत में मीनाक्षी मुखर्जी ने कहा कि बुद्धदेव सरकार नंदीग्राम और सिगुर के किसानों की जमीन इसलिए ली थी कि कारखाने खुल सकें। लोगों को रोजगार मिले।
ममता दीदी
और सुवेंदु अधिकारी ने मिल कर किसानों को गुमराह किया था। आज वही किसान अपनी जमीन पर कारखाना खोलने के लिए आवाज उठा रहे हैं। यकीन नहीं हो तो नंदीग्राम जाकर पूछ लीजिए। जिन किसानों ने गफलत में वाम मोर्चा को हराया था, वही किसान वाम मोर्चा गठबंधन को फिर बंगाल में वापस लाएंगे। आज नंदीग्राम में वाम मोर्चा का छोटा कार्यकर्ता भी बड़ा चेहरा है।

मीनाक्षी बोली, वे नंदीग्राम में पहली बार वोट मांगने जाएंगी। वैसे, उस इलाके में संगठन को मजबूत करने के लिए कई बार जा चुकी हैं। वहां की माटी की पुकार को सुनी हैं। समझती हैं। … जिसे दागी कहती थी, वही आज भाजपा के बड़े चेहरे

मीनाक्षी मुखर्जी ने कहा कि अगर बंगाल में भाजपा की हवा होती तो उसके पास हरेक विधानसभा क्षेत्र में इमानदार चेहरे होते। पांच से दस साल पहले के भाजपा नेताओं के भाषण सुन लीजिए। उस वक्त भाजपा जिन लोगों को दागी कहती थी, वही आज उस पार्टी के बड़े चेहरे हैं। अब भाजपा के लोग शारदा और नारदा घोटाले के आरोपितों की सूची क्यों नहीं सार्वजनिक करते। तृणमूल के जिन नेताओं पर आरोप लगाया था, उन्हीं को भाजपा ने अपनी नाव की पतवार थमा दी है। सोचिए कि बंगाल का क्या होगा।

… ममता पर हमला गलत, मगर शुरू भी उन्होंने कराया मीनाक्षी मुखर्जी ने कहा कि नंदीग्राम में ममता दीदी पर हमला गलत है। वे सीएम हैं। महिला हैं। जो कुछ भी हुआ, वो नहीं होना चाहिए था। मगर, राजनीतिक हिसा उन्होंने ही शुरूकराई। पंचायत चुनाव में विरोधी दलों के लोगों पर हमले हुए।

लोकसभा चुनाव में भी तृणमूल के लोगों ने आतंक फैलाया था। यहां तक कि बंगाल विधानसभा के भीतर विधायकों पर हमला किया गया। यह सब बंगाल पर दाग है। लोकतंत्र में हिसा का कतई स्थान नहीं है।

वाम मोर्चा के शासन में कभी भी राजनीतिक हिसा को बढ़ावा नहीं दिया गया था। कानून का शासन था। …मिथुन दा वामपंथी होते तो कभी भाजपा में नहीं जाते मीनाक्षी मुखर्जी बोली कि मिथुन दा वास्तव में वामपंथी होते तो कभी दक्षिणपंथी विचारधारा को स्वीकार नहीं करते। वास्तव में उनकी कोई विचारधारा नहीं है। विचारधारा कोई कपड़ा नहीं है जिसे चार बार बदला जाए।

युवा संगठन डीवीएफआइ की अध्यक्ष मीनाक्षी मुखर्जी
दरअसल, नंदीग्राम विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने वाली मीनाक्षी मुखर्जी मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी से है, जो कि माकपा के युवा संगठन डीवीएफआइ की अध्यक्ष है। वह एक छोटे से गांव चलबलपूर की रहने वाली है। उसने बचपन से अपने पिता की राजनीति को देखा है। लोकल लोगों के साथ हमेशा खड़े रहते हुए धीरे-धीरे जीला स्तर फिर राज्य स्तर पर अपने आप को प्रमाणित किया। उसने राजनीति में आने के लिए कुल्टी कॉलेज से अपनी नौकरी छोड़कर आई है।

यहां से स्कूल और कॉलेज की है पढ़ाई
मीनाक्षी मुखर्जी ने अपनी स्कूली पढ़ाई चलबलपूर जलधी देवी विधालय बेलरूई हाई स्कूल से की है। जबकि बी.बी कालेज से ग्रेजुएशन (आसनसोल) किया है। वहीं पोस्ट ग्रेजुएशन बर्दवान यूनिवर्सिट, Bed दुर्गापूर से की है।

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