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Mission 2022 Uttar Pradesh: सवर्णों के सहारे मैदान में उतरेगी मायावती

Mission 2022

Mission 2022 Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश के विधानसभा उप चुनाव में सभी सात प्रत्याशियों की पराजय के बाद बहुजन समाज पार्टी 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव में बदले समीकरण के साथ उतरेगी। पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष बदलने के साथ ही कोआर्डिनेटर्स के साथ भी अलग टीम लगा दी है।

मायावतीबहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 को लेकर बेहद गंभीर है। इसी को लेकर उन्होंने प्रदेश संगठन का कायाकल्प भी शुरू कर दिया है। अब बसपा मिशन 2022 पर नए जातीय समीकरण पर दांव लगाने की तैयारी में है।

भरोसेमंदों पर भरोसा

मायावती ने संगठन विस्तार में क्षेत्रीय जाति के आधार पर मुख्य सेक्टर प्रभारी, सेक्टर प्रभारी और जिला सेक्टर प्रभारी बना रही है। प्रदेश भर को 18 सेक्टरों में बांटा गया है। हर सेक्टर में भरोसेमंदों पर भरोसा जताया गया है। इसका मकसद विधानसभा चुनाव से पहले पिछली गलतियों को सुधारा जा सके। मायावती इस बार चुनाव में पूरी तैयारी के साथ उतरना चाहती हैं, जिससे चुनावी परिणाम उनके पक्ष में आ सके।

बूथ तक जोड़ेंगे यूथ

बसपा बूथ तक यूथ को जोड़ने का काम करेगी। संगठन विस्तार में युवाओं को अधिक तरजीह दी जाएगी। खासकर बूथ कमेटियों में इनको अधिक स्थान दिया जाएगा, जिससे चुनाव में इनका सही उपयोग किया जा सके। इसके साथ ही ढीले पड़ चुके पदाधिकारियों को हटा कर उनके स्थान पर सक्रिय कार्यकर्ताओं को अहमियत दी जाएगी।

प्रत्याशियों का तैयार होगा पैनल

बसपा विधानसभा चुनाव के लिए टिकट देने से पहले उम्मीदवारों का पैनल तैयार कराएगी। इसमें कोआर्डिनेटों की मुख्य भूमिका होगी। सूत्रों का कहना है कि हर विधानसभा से कम से कम टॉप-10 का पैनल बनाया जाएगा। इसमें जातीय समीकरण के आधार पर फिट बैठने वालों को मैदान में उतारा जा सके। बसपा इस बार पुराने ढर्रे से हटकर कुछ नए तरह से चुनावी समय में उतरना चाहती है, जिससे चुनावी हवा उसके पक्ष में बह सके।

सवर्णों का सहारा

बसपा ने 2007 विधानसभा चुनाव में सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले पर चुनाव लड़ा था। दलित, पिछड़े के साथ सवर्णों के सहारे वह सत्ता में आई, लेकिन वर्ष 2012 में इस फॉर्मूले को त्याग दिया। इसका खामियाजा भुगता और पार्टी उत्तर प्रदेश में तीसरे नम्बर पर खिसक गई। मायावती ने अब पार्टी प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर अति पिछड़ी जाति के भीम राजभर को बैठकर यह संकेत दिया है कि मिशन 2022 में वह पिछड़ों व सवर्णों को साथ लेकर आगे बढ़ेंगी।

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