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बंगाल बचाने का ममता के पास यह सुनहरा मौका

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केंद्र और कई राज्यों में जीत की झंडा गाड़ चुकी बीजेपी की नजर अब बंगाल पर है वह पूरे ऊर्जा के साथ मैदान में उतर चुकी है। फ़िलहाल यह तो आने वाला समय तय करेगा कि जनता कौन सी पार्टी को सत्ता की चाभी सौंपती है, लेकिन मौज़ूदा सिनारिओ देखने से लगता है कि भारतीयों जनता पार्टी फ्रंटफुट से बल्लेबाजी कर रही है और बाकी पार्टियां कैच लपकने के इरादे से बीजेपी को लगातार फ्लाइट देती जा रही है।

ममता की डोर क्यों हुई कमजोर-
खासकर तृणमूल कांग्रेस की बात करें तो वह बीजेपी की हिंदुत्व छवि के सामने लगातर घुटने टेकती जा रही है। ममता बनर्जी के ऊपर मुस्लिमों के प्रति सॉफ्ट राजनीति करने का तोहमत लगता रहा है। हालांकि, तृणमूल के सामने वाम मोर्चा और कांग्रेस पार्टियां होती तो इस तरह की राजनीति प्रोपेगेंडा इनके फायदे में होता। मगर यह भूल गई कि इनके सामने अब बीजेपी है। यही वजह है कि ममता बनर्जी मुस्लिम वोटरों को लुभाने के चक्कर में हिन्दु वोटरों का जनाधार खोती जा रही हैं।

ममता के पास अब भी मौका-
अभी भी चुनाव में लगभग चार महीने बाकी है, टीएमसी चाहे तो वापसी करने का हथकंडा अपना सकती है। फिलहाल उन्हें कुर्सी का लोभ त्याग कर (ऐसे भी सत्ता हाथ से जाती दिख रही है) वाम दलों और कांग्रेस के साथ मिलकर एक मजबूत गठबंधन बनाने की कवायद शुरू करनी होगी और मुख्यमंत्री का पासा कांग्रेस या वाम की झोली में फेंकते हुए उन्हें खुद को 2024 लोकसभा चुनाव के नजरिए से प्रधानमंत्री के तौर पर प्रस्तुत करना होगा। क्या पता राजनीति के बुरे दौर से गुजर रही दोनों पार्टियां (कांग्रेस,वामदल) आसानी से मान जाए।

written by sachin sarthak
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