Bihar

चिराग पासवान ने नीतीश पर साधा निशाना, बिहार में शराबबंदी को लेकर सवाल उठाया

लोकजनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष चिराग पासवान ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए राज्य में शराबबंदी की सफलता को लेकर सवाल उठाया। चिराग ने एक मामले का उल्लेख किया, जिसमें एक पार्षद कथित तौर पर नशे में उन्हें और उनके पिता रामविलास पासवान को अपशब्द कह रहा है।

चिराग ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लिखे पत्र में संजय यादव का जिक्र करते हुए कहा है कि खबरों में दावा किया गया है कि वीडिया में दिख रहा व्यक्ति नशे में धुत था। चिराग और उनके पिता रामविलास पासवान के लिए अपशब्दों के प्रयोग और धमकी वाला वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद संजय यादव को गिरफ्तार कर लिया गया है।
जद(यू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में चिराग पासवान ने कहा, ‘शराबबंदी आपकी एक महत्वकांक्षी योजना है। अगर प्रतिबंधों के बाद भी शराब बेची और पी जा रही है तो यह शराबबंदी के दावे पर सवाल खड़े करता है।’
उन्होंने मुख्यमंत्री से इसमें लिप्त लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। गौरतलब है कि चिराग पासवान बिहार की नीतीश कुमार सरकार पर निशाना साधते रहते हैं, जबकि दोनों ही पार्टियां भाजपा की सहयोगी हैं। बिहार में अक्तूबर-नवंबर में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं।

बिहार विधानसभा चुनाव अक्टूबर-नवंबर में नहीं कराने की मांग
इसके साथ ही लोक जनशक्ति पार्टी ने शुक्रवार को चुनाव आयोग को पत्र लिखकर बिहार विधानसभा चुनाव अक्टूबर-नवंबर में नहीं कराने की मांग की है और कहा है कि महामारी के हालात में चुनाव कराना जानबूझकर लोगों को मौत की तरफ धकेलने के समान होगा।

लोजपा ने कहा कि इस समय संसाधनों का इस्तेमाल कोविड-19 संकट से निपटने में तथा राज्य में बाढ़ से निपटने में होना चाहिए, न कि चुनाव कराने में।
पार्टी ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी पहले ही खतरनाक स्वरूप ले चुकी है और जानकारों का मानना है कि अक्टूबर-नवंबर में यह और खतरनाक स्तर पर हो सकती है, इसलिए इस समय प्राथमिकता लोगों की जान बचाने की होनी चाहिए, न कि चुनाव कराने की।

चुनाव कराने के संबंध में लोजपा का रुख राजग में भाजपा की अन्य सहयोगी पार्टी जदयू के विपरीत है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले जदयू ने समय पर चुनाव कराने की वकालत की है और इसकी तैयारियों के सिलसिले में पार्टी संगठन स्तर पर बैठकें भी कर रही है।

भाजपा का कहना है कि चुनाव की तारीखों पर कोई भी फैसला चुनाव आयोग का विशेषाधिकार है, वहीं बिहार में मुख्य विपक्षी राष्ट्रीय जनता दल कोरोना वायरस के खतरे के मद्देनजर चुनाव टालने की मांग कर चुका है। बता दें कि आयोग ने चुनाव कराने पर सभी दलों के विचार पूछे हैं।

लोजपा ने कहा कि चुनाव कराने के लिए एक बड़ी आबादी की जान को खतरे में डालना पूरी तरह अनुचित है। पार्टी ने कहा कि देश में अब तक कोरोना वायरस संक्रमण से 35 हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है जिनमें 280 मामले बिहार के हैं।

पार्टी ने चुनाव आयोग से कहा, ऐसे हालात में चुनाव कराना जानबूझकर लोगों को मौत की ओर धकेलने के समान होगा। लोजपा ने कहा कि बिहार में आठ करोड़ से अधिक मतदाता हैं और इतनी बड़ी आबादी के लिए सामाजिक दूरी के नियमों का पालन करते हुए प्रचार और मतदान करना लगभग असंभव होगा।

पार्टी ने कहा कि चुनाव प्रचार लंबी प्रक्रिया है जिसमें उम्मीदवार कई दिन तक प्रचार करते हैं। उन्होंने कहा कि इस समय यह जनसंपर्क अभियान खतरनाक होगा।

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