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उद्धव ठाकरे को धृतराष्ट्र और उनके बेटे को पेंगुइन कहने पर फेसबुक यूजर के खिलाफ कार्रवाई: 10 लाख की मानहानि का दावा

महाराष्ट्र सरकार द्वारा सोशल मीडिया पर उद्धव ठाकरे और उनके बेटे की आलोचना करने वाले लोगों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। ताजा घटना में, एक फेसबुक यूजर द्वारा महाराष्ट्र के सीएम की तुलना धृतराष्ट्र से और अदित्य ठाकरे को पेंगुइन कहने पर 10 लाख रुपए के मानहानि का मुकदमा ठोका गया है।

बता दें महाराष्ट्र सरकार की आलोचना करने वाले अपने फेसबुक पोस्ट की वजह से मुंबई के कमाठीपुरा के रहने वाले बालकृष्ण दीकोंडा (Balakrishna Deekonda) मुसीबत में पड़ गए हैं। मुख्यमंत्री और राज्य सरकार ने उन्हें सीएम और उनकी सरकार की प्रतिष्ठा को खराब करने का आरोप लगाते हुए एक वैधानिक नोटिस भेजा है। यह नोटिस शिवसेना के एक कार्यकर्ता श्री शिव आर.साधु द्वारा भेजा गया है, जो मुंबई के एंटॉप हिल इलाके में मोतीलाल नेहरू नगर में गत प्रधान हैं।

मुंबई स्थित अधिवक्ता प्रकाश यू सुतार के माध्यम से भेजे गए नोटिस में दीकोंडा के कई पोस्ट को कोट करते हुए कहा गया कि इनमें सीएम और सरकार के लिए बदनाम करने वाले और अपमानजनक बयान हैं। नोटिस में दीकोंडा के आपत्तिजनक पोस्ट की कॉपी को भी लगाया गया है। सोशल मीडिया यूजर ने अपने 25 अगस्त को किए एक पोस्ट में कहा था, “कोई बात नहीं पेंगुइन सरकार मात्र कुछ और दिनों के लिए ही है।” मुंबई मिरर पर प्रकाशित एक सर्वेक्षण रिपोर्ट साझा करते हुए कहा कि 64% उत्तरदाता उद्धव ठाकरे से खुश नहीं हैं, और 70% लॉकडाउन को खत्म करना चाहते है।

18 अप्रैल को किए अपने एक अन्य पोस्ट में बालकृष्ण ने द प्रिंट का एक ओपिनियन आर्टिकल साझा किया था, जिसका शीर्षक था, “उद्धव ठाकरे कोविड महामारी से निपटने में विफल रहे हैं। मुंबई को बचाने के लिए सेना लाओ।” लेख का लिंक साझा करते हुए उन्होंने लिखा था, “200.. धृतराष्ट्र?”

नोटिस में कहा गया है कि दीकोंडा ने जानबूझकर कर जनता की नज़र में मुख्यमंत्री और राज्य सरकार को बदनाम और अपमानित किया है और इसके लिए उन्हें एक स्थानीय समाचार पत्र, एक राष्ट्रीय समाचार पत्र और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर माफी माँगनी चाहिए जहाँ उन्होंने कमेंट किया है।

गौरतलब है कि नोटिस में यह भी कहा गया है कि माफी के साथ महाराष्ट्र के सीएम ने दीकोंडा से 10 लाख रुपए का हर्जाना भी माँगा है, जिसे टाटा मेमोरियल अस्पताल में जमा करना है। अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो उसके खिलाफ नागरिक और आपराधिक कार्यवाही शुरू की जाएगी।

वहीं नोटिस में इस बात को दोहराया गया है कि महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे और राज्य सरकार की प्रतिष्ठा को खराब करने की वजह से उन्हें सार्वजनिक माफी माँगनी चाहिए और नुकसान का भुगतान करना चाहिए, अन्यथा उन्हें इसके परिणाम भुगतने होंगे।

वहीं कानूनी नोटिस के बाद सोशल मीडिया यूजर को वडाला टीटी पुलिस स्टेशन ने भी एक नोटिस जारी किया, जिसमें उन्हें पुलिस के सामने पेश होने के लिए कहा गया। इस नोटिस में उन्हें नोटिस मिलते ही पुलिस स्टेशन को फोन करने और 3 दिन के अंदर पेश होने के लिए कहा गया है।

उल्लेखनीय है कि सिर्फ बालकृष्ण दीकोंडा ही नहीं कई अन्य व्यक्ति भी सरकार की आलोचना करने वाली अपनी टिप्पणियों के लिए महाराष्ट्र सरकार द्वारा की जा रही कार्रवाई का सामना कर रहे हैं। इनमें समीत ठक्कर शामिल हैं, जिन्हें एक ही टिप्पणी के लिए तीन बार गिरफ्तार किया गया था। वहीं सुनैना होले नाम की एक यूजर को उनके ट्वीट के लिए दो बार गिरफ्तार किया गया था। विभोर आनंद नाम के एक वकील को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था, इस लिस्ट में और भी कई लोग शामिल है।

उल्लेखनीय है कि इस वर्ष मई में महाराष्ट्र राज्य सरकार ने निषेधात्मक आदेश जारी किए थे। जिसके चलते सरकार की आलोचना करना अपराध श्रेणी में गिना जाने लगा। साथ ही शिवसेना ने सरकार की आलोचना करने वाले सोशल मीडिया पोस्ट को ट्रैक करने और उनपर कानूनी कार्रवाई करने के लिए एक टीम भी बनाई थी।

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