featured

बंगाल में युवा चेहरों पर दांव लगा रही वाम, कितना हो पाएगी कामयाब

tmc

बंगाल विधानसभा चुनाव में वामपंथी पार्टिया येनकेन-प्रकारेण चुनाव जीतने को आतुर हैं। इसके लिए उन्होंने अपनी आदर्श, नीति और नैतिकता को भी किनारे लगा दिया है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण फुरफुरा शरीफ के धार्मिक नेता और पीरजादा अब्बास सिद्दीकी से हाथ मिलाना है। हालांकि धर्मनिरपेक्ष होने का दंभ भरने वाले कामरेडों का तर्क है कि अब्बास धार्मिक नेता जरूर हैं, लेकिन वह सांप्रदायिक राजनीति नहीं करते। यदि वाम दलों के नेताओं के चश्मे से देखा जाए तो अब्बास की पार्टी का नाम इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आइएसएफ) है तो फिर वह सांप्रदायिक कैसे हो जाएगा।
यही नहीं, वर्षो पुराने वृद्ध नेताओं पर भरोसा करने वाली माकपा ने अपनी नीति भी बदल दी है। उन्हें पता है कि इस बार यदि चुनाव में अच्छी सफलता नहीं मिली तो उनके लिए अस्तित्व बचाए रखना मुश्किल हो जाएगा। इसलिए माकपा ने बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस और भाजपा को टक्कर देने के लिए युवा चेहरों पर भरोसा किया है। वैसे भी वामदलों के पास जिलों में संगठन और नेता के नाम पर अधिक लोग बचे नहीं हैं। ऐसे में पार्टी की युवा शाखा के नेताओं पर दांव लगाना मजबूरी और जरूरी दोनों है।

वाममोर्चा अध्यक्ष विमान बोस ने पार्टी प्रत्याशियों की सूची जारी की तो उसमें जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र संघ की अध्यक्ष आइशी घोष, डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीवाइएफआइ) की प्रदेश अध्यक्ष मीनाक्षी मुखर्जी, स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआइ) की राष्ट्रीय संयुक्त सचिव दीप्शिता धर, एसएफआइ के प्रदेश अध्यक्ष प्रतिकुर रहमान, डीवाइएफआइ के राज्य सचिव सायनदीप मित्र जैसे युवाओं को उतारा है। नंदीग्राम में मीनाक्षी मुखर्जी को उतारा गया है।

मीनाक्षी बंगाल की मुख्यमंत्री व तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जीभाजपा के सुवेंदु अधिकारी से लोहा लेंगी। सायनदीप मित्र कमरहट्टी से चुनाव लड़ेंगे। डायमंड हार्बर से प्रतिकुर रहमान और बाली से दीप्शिता धर चुनाव लड़ेंगी। 2016 के विधानसभा चुनाव में माकपा ने महज 26 सीटें जीती थी। परंतु यहां सवाल यह उठ रहा है कि जिन युवाओं पर कामरेडों ने दांव लगाया है उससे लोग कितने प्रभावित होंगे? आज लोग चेहरे और युवा देखकर वोट नहीं देते। आज हालात यह है कि लोगों की आशा और उम्मीदों को कौन पूरा कर सकता है। देशहित और राज्यहित कौन सोचता है यह देकर वोट देते हैं। इस रणनीति से कामरेड कितनी सीटें जीतते हैं यह तो दो मई को पता चल जाएगा।

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

WHATS HOT

Most Popular

To Top