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जानिए पहले चरण का रुझान, खेला होबे या कमल खिलबे

पठारों में बसा झाड़ग्राम में चुनावी मिजाज को जानने के लिए हम लोग कोलकाता से रवाना हुए, जो कोलकाता से करीब 160 किलोमीटर की दूरी पर है। सफर में लोधासुली जंगल से गुजरते वक्त नीचे जमीन पर पड़ी सूखी पत्तियाँ न केवल पतझड़ के आने का इशारा कर रही थी बल्कि झारग्राम में बदलती सियासी मिजाज का तस्दीक भी कर रही थी।

कई वर्षों तक माओवादियों के कब्जे में रहा यह झाड़ग्राम भौगोलिक दृष्टि से शुष्क और सूखा क्षेत्र है जो बिहार व झारखंड के सीमा से सटा और छोटा नागपुर के पठार की गोद में बसा है। जहां आज प्रथम चरण का मतदान खत्म हुआ है।

करीब 160 किलोमीटर की दूरी को तय करते हुए हम लोगों के झारग्राम पहुंचे वहां के लोगों से चुनावी मुद्दों पर बातचीत की। हालांकि, यहां ज्यादातर लोग राजनीति पर बात करने से कतराते हैं, लेकिन फिर भी हमने कोशिश करके यहां एक होटल व्यवसायी से बातचीत की जो सभी राजनीतिक पार्टी के नेताओं का मेजबानी करता है। उसने कहा कि यहां के स्थानीय निवासी वर्तमान सरकार से नाखुश है।

सड़क को लेकर लोगों में खुशी थी क्योंकि 34 साल के लेफ्ट की सरकार से यह उम्मीद तो कतई नहीं थी। लेकिन रोजगार नहीं मिलने की वजह से ममता सरकार से कुछ स्थानीय निवासी नाखुश दिख रहे थे, शायद इसी वजह से ममता बनर्जी ने झाड़ग्राम और जंगल महल के क्षेत्रों में ज्यादा चुनावी लामबंदी की है कुछ ये भी कह रहे थे कि भाजपा शासित राज्यों में भी बेरोजगारी यहां से ज्यादा है।

टीएमसी ने इस बार मेदनीपुर से हाल ही में पार्टी में शामिल हुई जून मलैया को उतारा है, वहीं बीजेपी ने पूर्व जिला अध्यक्ष समित कुमार दास को टिकट दिया है। सीपीएम ने पूर्व विधायक कामाख्या घोष के बेटे तरुण कुमार घोष पर दांव है।

झारग्राम सीट से पूर्व विधायक चूनीबाला हांसदा की बेटी और संथाली फिल्मों की अभिनेत्री बिरबा तृणमूल कॉन्ग्रेस के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं।
सीपीएम नेता मधुजा सेनोरॉय का मुकाबला बीजेपी के सुखमय सतपथी से है।

2000 के दशक के अंत में, माओवादियों का पर्याय बन चुका झाड़ग्राम और जंगलमहल में शांति बहाल कराने के लिए आईपीएस ऑफिसर भारती घोष का नाम आता है जो मेदिनीपुर जिले की डेबरा विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी के टिकट से चुनावी मैदान में है। टीएमसी ने यहाँ उनके खिलाफ इसी साल फरवरी में पार्टी में शामिल पूर्व आईपीएस अधिकारी हुमायूँ कबीर को टिकट दिया है।

यहां के स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस क्षेत्र में अभी भी माओवादियों का प्रभाव है और ममता बनर्जी ने माओवादी कमांडर रहे छत्रधर महतो को अपने पार्टी में शामिल कर एक बड़ा दांव खेला, जो एक बड़ी आबादी को अपनी ओर आकर्षित कर करने में सफल भी रहा है।

बंगाल चुनाव के प्रथम चरण का मतदान कल खत्म हो गया। लेकिन स्थानीय लोगों से बातचीत से यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि ऊँट किस करवट बैठेगा। शायद यही कारण है कि चुनावी विश्लेषक भी अनुमान लगाने से बच रहे हैं कि कौन सी पार्टी सत्ता में आएगी।

हालांकि, बीजेपी का 2019 लोकसभा चुनाव परिणाम के बाद से ही हौसला बुलंद हैं। इसी बुलंद हौसले के साथ बैटल अॉफ बंगाल में उतरी है। और सोनार बांग्ला बनाने का वादा भी कर रहीं है।

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