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भारत और चीन पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग त्सो क्षेत्र से हट रहे है पीछे

भारत और चीन पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग त्सो क्षेत्र से पीछे हटने के लिए सहमत हो गए हैं और लगभग नौ महीने के गतिरोध के बाद दोनों देशों ने वापस यथास्थिति में जाने का फैसला किया है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राज्यसभा में गुरुवार को यह जानकारी दी।

सिंह ने कहा कि समझौते के अनुसार, चीनी सेना पैंगोंग त्सो के उत्तरी किनारे में फिंगर 4 क्षेत्र से फिंगर 8 से आगे नहीं आने देगा और वापस खींचेगा. इसी तरह, इसी तरह भारत भी अपनी सेना की टुकडि़यों को फिंगर 3 के पास अपने परमानेंट धन सिंह थापा पोस्ट पर रखेगा।

राजनाथ सिंह के भाषण के कुछ महत्वपूर्ण अंश

1. माननीय सभापति महोदय जी पिछले साल सितम्बर में इस गरिमामयी सदन के समक्ष मैंने एक विस्तृत वक्तव्य ईस्टर्न लद्दाख में भारत-चीन सीमा पर हुई Developments के बारे में दिया था। मैंने यह बताया था कि चीन द्वारा पिछले वर्ष अप्रैल-मई, 2020 के दौरान ईस्टर्न लद्दाख की सीमा के समीप भारी संख्या में सशस्त्र बल तथा गोलाबारूद आदि इकट्ठा कर लिया गया था। चीन द्वारा LAC के आसपास कई बार transgression का प्रयास भी किया गया था . हमारी सशस्त्र सेनाओं ने उन सभी प्रयासों के दृष्टिगत उपयुक्त जवाबी कार्रवाई की थी। राष्ट्र के साथ इस सदन ने भी उन वीर भारतीय सैनिकों को श्रृद्धांजलि दी थी जिन्होंने भारत की सीमा की रक्षा करते हुए अपना बलिदान दे दिया था। आज मैं इस सदन को कुछ और महत्वपूर्ण developments के बारे में बताना चाहता हूं।

2. पिछले वर्ष सितम्बर से दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के साथ Military and diplomatic channels द्वारा संवाद स्थापित कर रखा है. हमारा यह लक्ष्य है कि LAC पर disengagement तथा यथास्थिति हो जाए ताकि peace and tranquility पुनः स्थापित हो सके।

3. मैं संक्षेप में वहां की ground situation के बारे में सदन को दोबारा अवगत कराना चाहता हूं। सदन को ज्ञात है कि चीन ने अनधिकृत तरीके से लद्दाख केन्द्र शासित प्रदेश के लगभग 38000 वर्ग किमी पर 1962 के संघर्ष के समय से कब्जा बना लिया है। इसके अतिरिक्त, पाकिस्तान ने अनधिकृत तरीके से POK में भारत की लगभग 5180 वर्ग किमी भूमि तथाकथित Sino-Pakistan Boundary Agreement 1963 के तहत चीन को दे दिया है। इस प्रकार चीन का 43000 वर्ग किमी से ज्यादा भारतीय भूमि पर अनधिकृत कब्जा है। चीन पूर्वी क्षेत्रों में भी अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर करीब 90000 वर्ग किमी भूमि को अपना बताता है। भारत ने इन unjustified claims तथा अनधिकृत कब्जे को कभी भी स्वीकार नहीं किया है।


4. मैं सदन को यह भी बताना चाहता हूं कि भारत ने चीन को हमेशा यह कहा है कि Bilateral relation दोनों पक्षों के प्रयास से ही विकसित हो सकते हैं, साथ-साथ ही सीमा के प्रश्न को भी बातचीत के जरिए हल किया जा सकता है। परंतु LAC पर peace and tranquility में किसी प्रकार की प्रतिकूल स्थिति का हमारी Bilateral Ties पर बुरा असर पड़ता है। इससे चीन भी अच्छी तरह से अवगत है। कई high level joint statement में भी यह जिक्र किया गया है कि LAC तथा सीमाओं पर peace and tranquility कायम रखना Bilateral Relation के लिए अत्यंत आवश्यक है।

5. पिछले वर्ष से चीन के द्वारा उठाए गए कदमों के कारण Peace and tranquility पर प्रतिकूल असर पड़ा है। इसके फलस्वरूप चीन और भारत के संबंधों पर भी प्रभाव पड़ा है। उच्च स्तर पर चीन के साथ कई बार बातचीत के दौरान, जिसमें मेरे द्वारा चीनी रक्षा मंत्री के साथ पिछले सितम्बर की बैठक, मेरे सहयोगी विदेशी मंत्री जय शंकर जी की चीनी विदेश मंत्री के साथ तथा NSA श्री अजीत डोभाल जी की अपने चीनी counterpart के साथ बातचीत शामिल है, हमने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह अत्यंत आवश्यक है कि LAC के सभी Friction Point पर Disengagement किया जाए ताकि peace and tranquility पुनः स्थापित हो सके।

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