featured

अगर नहीं जानते तो, मायावती के बारे में यह 5 बातें अभी जान लीजिए

मायावती

देश की पहली दलित महिला मुख्यमंत्री के तौर पर मायावती की अपनी एक शख्सियत है। जो बाकी नेताओं को दरकिनार करते हुए भारतीय राजनीति में एक अलग पहचान बनाता है। दिल्ली की तंग गलियों से निकली एक युवा दलित महिला ने अपने बलबूते राजभवन तक का सफ़र तय किया। कभी एनकाउंटर होने से बाल-बाल बची तो कभी जानलेवा हमले से… लेकिन बसपा सुप्रीमो किसी चट्टान की तरह डटी रहीं। चलिए हमारे साथ… मायावती की ज़िंदगी के सफ़र पर….मायावती के बारें में वह पांच बातें जो पहले आपने कभी नहीं सुनी होंगी।

1. मायावती का जन्म दिल्ली के इंद्रपुरी इलाक़े में 15 जनवरी 1956 को हुआ था। 1975 में मायावती ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस और इकॉनोमिक्स में बीए की डिग्री हासिल की। उसके बाद उन्होंने बी.एड. की पढ़ाई की और बतौर टीचर काम करते हुए डीयू से अपनी एलएलबी की डिग्री भी हासिल की। मायावती यूपीएससी की परीक्षा पास कर एक आईएएस अफ़सर बनना चाहती थी और उसके लिए तैयारी भी करती थीं। लेकिन मान्यवर कांशीराम साहब के कहने पर मायावती ने अपना घर और सपना दोनों छोड़ दिए।

2. मायावती के पिता प्रभुदयाल पोस्ट ऑफिस में क्लर्क थे और वो चाहते थे कि उनकी बेटी पढ़ लिखकर IAS बने लेकिन जब बीएसपी सुप्रीमो ने कांशीराम जी के साथ जाने का निर्णय लिया तो प्रभुदयाल जी काफी दुखी हुए। उन्होंने ये तक कह दिया था कि अगर ये रास्ता चुनना है तो बीएसपी सुप्रीमो को घर छोड़ना पड़ेगा। इस कठोर फैसले के बाद मायावती ने घर छोड़ दिया और मान्यवर कांशीराम साहब के साथ वो चल पड़ी सियासत के उस सफर पर जिसका सपना देखना भी भारत के दलितों के लिए किसी मुश्किल से कम नहीं था।

दरअसल इस मुलाक़ात से एक दिन पहले बसपा सुप्रीमो दिल्ली के कंस्टीट्यूशन क्लब में भाषण दे रही थी… बीएसपी सुप्रीमो ने मंच से ही कांग्रेसी नेता राजनारायण को दलितों को बार बार हरिजन कहने पर बुरी तरह लताड़ा था। एक 21 साल की लड़की का ऐसा रुख़ देखकर ही मान्यवर कांशीराम साहब मायावती से प्रभावित हो गए थे।

3. 1984 में बहुजन समाज पार्टी की स्थापना हुई। दिल्ली के रामलीला मैदान में मान्यवर कांशीराम और मायावती ने देश के बहुजनों की तक़दीर बदलने की हुंकार भरी और इस तरह से मायावती चुनावी राजनीति में पूरी तरह से सक्रिय हो गईं। इस बारे में मायावती ने कहा था ‘मैंने राजनीति में आने का जो फ़ैसला किया तो मुझे दूसरे नेताओं की तरह राजनीति विरासत में नहीं मिली। हमारे परिवार में कोई राजनीति में नहीं है, दूर-दूर तक हमारे रिश्ते नातों में भी कोई राजनीति में नहीं है।’ लेकिन बिना राजनीतिक विरासत के भी मायावती ने देश की सियासत खलबली मचा दी।

मायावती और कांशीराम साहब के रिश्ते को लेकर भी सवाल उठते रहे। अक्सर उनके चरित्र पर भी दाग़ लगाने की कोशिश की गई। दोनों के बारे में ना जाने कैसी-कैसी बातें की गई लेकिन इससे बीएसपी सुप्रीमो विचलित नहीं हुईं।

4. एक इंटरव्यू में मायावती ने इस बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में कहा था ‘जब कोई त्याग करके आगे बढ़ता है तो विरोधियों के पास एक ही मुद्दा होता है, कैरेक्टर को लेकर बदनाम करना। मान्यवर कांशीराम जी को मैं अपना गुरु मानती हूँ और वो मुझे अपना शिष्य मानते हैं। ’

5. मायावती के हेयरस्टाइल के पीछे भी एक कहानी है। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था। ‘दरअसल लंबे बाल होने पर मुझे बार-बार उन्हें बांधना पड़ता था। मुझे 6-7 जगह जाना पड़ता था तो बार-बार कंघी करके बाल बांधने पड़ते थे और मेरा समय बहुत ख़राब होता था। इसलिए अपना समय बचाने के लिए मैंने बाल ही कटवा दिए ताकि मेरा वक़्त बर्बाद ना हो।

मायावती एक ऐसा किरदार है जिनकी शख़्सियत का अंदाज़ा सिर्फ़ चुनावी नतीजों के आधार पर लगाना उनके व्यक्तित्व को कम आँकने जैसा होगा। अगर बीएसपी सुप्रीमो 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में कोई चमत्कार कर दिखाती हैं तो निश्चित तौर पर दलित राजनीति का भविष्य एक बार फिर से बीएसपी सुप्रीमो के भरोसे ही तय होगा।

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Most Popular

To Top