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कृषि कानून आंदोलन के बीच किसान दिवस

किसान दिवस

नये कृषि कानूनों पर जारी आंदोलन के बीच आज देश में किसान दिवस मनाया जा रहा है। पिछले 28 दिनों से किसान केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि इन 3 नए कृषि कानूनों से किसानों को बड़ा फायदा होगा। इससे बिचौलिए खत्म होंगे और वही किसानों की आय बढ़ेगी, तो वहीँ किसान तीनों कानूनों को खत्म करने की मांग पर अड़े हुए हैं।

कब और क्यों मनाया जाता है राष्ट्रीय किसान दिवस

हर वर्ष राष्ट्रीय किसान दिवस 30 दिसंबर को भारत के पांचवें प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के जन्म दिवस पर मनाया जाता है।

चौधरी चरण सिंह का जन्म उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में 23 दिसंबर को हुआ। इनका प्रधानमंत्री पद पर कार्यकाल ज्यादा दिनों तक नहीं रहा था। चौधरी चरण सिंह ने अपने कार्यकाल के दौरान किसानों की दशा सुधारने के लिए कई नीतियां बनाई। इन्हीं के कारण देश में जमीदारी प्रथा खत्म हुई थी। वह देश के जाने-माने किसान नेताओं में से एक थे। जिनका राष्ट्रीय राजनीति में बहुत ही अहम योगदान रहा है।

किसान दिवस मनाने की शुरुआत 2001 से हुई थी।चौधरी चरण सिंह द्वारा तैयार किया गया जमींदारी उन्मूलन विधेयक राज्य के कल्याणकारी सिद्धांत पर आधारित था। इसके कारण ही उत्तर प्रदेश में 1 जुलाई 1952 को जमींदारी प्रथा खत्‍म हुई थी और गरीबों को उनका अधिकार मिला था।

चौधरी चरण सिंह को किसानों से अत्यंत स्नेह था क्योंकि वह खुद किसान परिवार से थे। वह किसानों की समस्याओं को अच्छी तरह समझते थे इसलिए उन्हें किसानों का मसीहा भी कहा जाता था। उन्होंने किसानों के सुधारों के बिल पेश करके देश के कृषि क्षेत्र में भी अहम भूमिका निभाई थी। किसानों को भारत के आर्थिक विकास की रीड की हड्डी माना जाता है और देश में किसानों के महत्व और देश के समग्र आर्थिक और समाजिक विकास के बारे में लोगों में जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए हर साल 23 दिसंबर को किसान दिवस मनाया जाता है।

28 दिनों से जारी किसान प्रदर्शन

पिछले 28 दिनों से किसान लगातार आंदोलन कर रहे हैं और कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग पर अड़े हुए हैं। किसान केंद्र सरकार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर घेरने की तैयारी में लगे हुए हैं। किसान नेताओं ने इंग्लैंड के सांसदों को पत्र भेजकर अपील की है कि वह अपने प्रधानमंत्री को किसानों के समर्थन में भारतीय गणतंत्र दिवस समारोह में शिरकत करने के लिए आने से रोकें। किसानों ने देर शाम सरकार को जवाब देने के लिए भी अपनी रणनीति का ऐलान किया है। आज सभी संगठनों से मंत्रणा करने के बाद या जवाब केंद्र को भेजा जाएगा कि किसानों का सवाल है कि केंद्र सरकार बताए कि कृषि कानून रद्द होंगे या नहीं, फिर इसके बाद वह बताएंगे कि बातचीत के लिए आगे जाएंगे या नहीं। यहां तक कि यह भी बात सामने आई है कि किसानों ने इस साल राष्ट्रीय किसान दिवस नहीं मनाने का फैसला किया है। किसानों ने देशवासियों से किसान दिवस के दिन और एक टाइम का खाना छोड़ने और आंदोलन को समर्थन देने की अपील भी की है।

Kanchan Goyal

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