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अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा शुरु, तो हरियाणा में बोल्ड हो जाएगी बीजेपी

हरियाणा विधानसभा के सदन में सरकार के खिलाफ बुधवार को अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है। विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता ने इसे मंजूरी देते हुए चर्चा शुरू करा दी है। पूर्व सीएम व नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने अविश्वास प्रस्ताव को पढ़ना शुरू किया। इस दौरान प्रस्ताव लाने सभी विधायकों ने सदन में खड़े होकर अपना समर्थन जाहिर किया। 

हरियाणा के बजट सत्र के चौथे दिन सरकार के खिलाफ आज विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव लाएगा। हालांकि इसे लेकर हरियाणा सरकार बिल्कुल सहज है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल का कहना है कि हम विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव को हराएंगे। 

शाह आलम के शासन से की हरियाणा सरकार की तुलना
हुड्डा ने आगे कहा कि सीमा पर बैठीं महिलाएं मुख्यमंत्री को दिखाई क्यों नहीं देतीं। यह सरकार बहुमत की सरकार नहीं है। इसे जनता का विश्वास नहीं मिला है। किसी दूसरे दल की बैसाखी से सत्ता मे आई है। इस दौरान भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने हरियाणा की गठबंधन सरकार की तुलना शाह आलम के शासन से की। भूपेंद्र हुड्डा ने कहा कि सरकार के मंत्री और विधायक गांवों में नहीं जा पा रहे हैं। हालात यह हैं कि सीएम को पंचकूला में 26 जनवरी को झंडा फहराना  पड़ा। 

लोहे की लाठियों से किसानों के सिर नहीं फूटने वाले : हुड्डा
हुड्डा ने आगे कहा कि दिल्ली बॉर्डर पर एक राज्य के नहीं बल्कि पूरे देश के किसान बैठे हैं। किसानों पर लाठीचार्ज और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया। लोहे की लाठियां बरसाईं गईं। सड़कों पर कीलें लगाई गईं। लेकिन किसानों के सिर लोहे के लाठियों से फूटने वाले नहीं है। उन्होंने भाजपा और जजपा के घोषणा पत्र में किसानों को लेकर किए गए वादों का जिक्र कर सरकार को घेरा और कहा कि सरकार ने न तो स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू की, न ही किसानों को बोनस दिया। इस दौरान कांग्रेस के विधायकों ने शेम- शेम के नारे लगाए।

क्या कहते हैं सियासी समीकरण?
हरियाणा विधानसभा में 90 सीटें हैं और वर्तमान में उसमें 88 सदस्य (विधायक) हैं। उनमें से भाजपा के 40, जजपा के 10 और कांग्रेस के 30 सदस्य हैं। 7 निर्दलियों में से 5 सरकार के साथ हैं। इसके अलावा एक विधायक हरियाणा लोकहित पार्टी के हैं और वह भी सरकार के साथ हैं। हरियाणा की गठबंधन सरकार का दावा है कि उसके साथ 55 विधायक हैं और उनकी सरकार को कोई खतरा नहीं है। मालूम हो कि अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष या विपक्ष में कुल 45 वोट होने चाहिए और 2 घंटे की चर्चा के बाद जो मतदान होगा और उसकी काउंटिग हेडकाउंट करके की जाएगी।

क्या होता है अविश्वास प्रस्ताव? अविश्वास प्रस्ताव या विश्वास मत एक व्यवस्था है, जिसके जरिए सरकारें ये साबित करती हैं कि उनके पास सत्ता में बने रहने के लिए पर्याप्त विधायकों या सांसदों के नंबर्स है। विश्वास मत सरकार खुद लाती है. अविश्वास प्रस्ताव विपक्षी पार्टियां लाती हैं। यह प्रस्ताव सदन में तब आता है जब विपक्ष को लगता है कि सरकार सदन का विश्वास या बहुमत खो चुकी है। ऐसा ही आज कांग्रेस को लग रहा है और इसी वजह से वो भाजपा-जजपा गठबंधन सरकार के लिए अविश्वास प्रस्ताव लेकर आई है।

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