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मिशन बंगाल फतह करने के लिए BJP की टीम-11, शाह-नड्डा हर महीने करेंगे दौरा

पश्चिम बंगाल की सत्ता पर दस साल से काबिज ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को मात देने के लिए बीजेपी पूरे जोर शोर से जुट गई है. सूबे में 200 प्लस सीटें जीतने के लक्ष्य के लिए बीजेपी ने एक तरफ अपनी टीम-11 को बंगाल की रणभूमि में उतारा है तो दूसरी तरफ केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने खुद भी मोर्चा संभाल लिया हैं.

बिहार की चुनावी जंग फतह करने के बाद बीजेपी की नजर पश्चिम बंगाल पर है. बंगाल की सत्ता पर दस साल से काबिज ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को मात देने के लिए बीजेपी पूरे जोर शोर से जुट गई है. सूबे में 200 प्लस सीटें जीतने के लक्ष्य के लिए बीजेपी ने एक तरफ अपनी टीम-11 को बंगाल की रणभूमि में उतारा है तो दूसरी तरफ केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने खुद भी मोर्चा संभाल लिया हैं और अब हर महीने बंगाल दौरा करने की रणनीति बनाई है.

ममता बनर्जी के अभेद्य किले को ढहाने के लिए बीजेपी ने बंगाल को 5 क्षेत्रों में बांटा है. बीजेपी ने सूबे को उत्तरी बंगाल, राढ़ बंग (दक्षिण पश्चिमी जिले), नवद्वीप, मेदिनीपुर और कोलकाता में विभाजित किया है. इन पांचों क्षेत्रों के लिए बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुनील देवधर, विनोद तावड़े, दुष्यंत गौतम, हरीश द्विवेदी और विनोद सोनकर को प्रभारी बनाया गया है. बीजेपी के ये सभी दिग्गज नेताओं ने अपने-अपने इलाकों की जिम्मेदारी संभाल लिया है.

पूर्वोत्तर के त्रिपुरा में दो साल पहले वामदलों का किला ध्वस्त करने में अहम भूमिका निभाने वाले सुनील देवधर को एक बार दक्षिण भारत से लेकर बंगाल में लगाया गया है. उन्हें मेदिनीपुर का प्रभारी बनाया गया है, जहां कमल खिलाने की जिम्मेदारी उनकी होगी. बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत गौतम को कोलकाता क्षेत्र का दायित्व सौंपा गया है. वहीं, राष्ट्रीय सचिव हरीश द्विवेदी को उत्तरी बंगाल और विनोद सोनकर को राढ़ बंग का प्रभारी नियुक्त किया गया है. पार्टी के राष्ट्रीय सचिव विनोद तावड़े को नवद्वीप क्षेत्र का प्रभार दिया गया है. इन दिग्गजों ने अपने-अपने इलाके में मोर्चा संभाल लिया है.

बीजेपी के बंगाल के अलग-अलग इलाके के प्रभारी अपने-अपने क्षेत्रों में रहकर अपने इलाके की विधानसभा सीट का प्रोफाइल तैयार करेंगे. जिसमें उस सीट के जातिगत समीकरणों, प्रभावशाली नेताओं की पहचान, वहां बीजेपी की मौजूदा स्थिति, अगर स्थिति कमजोर है तो उसके कारण. इस तरह से अपने इलाके की छोटी से छोटी जानकारी इकट्ठा कर एक रिपोर्ट तैयार करना बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व को सौंपेगे.

बंगाल बीजेपी अध्यक्ष दिलीप घोष ने बुधवार को बताया कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय गृहमंत्री हर महीने पार्टी संगठन का जायजा लेने के लिए दौरा करेंगे. बीजेपी के दोनों नेताओं का यह सिलसिला चुनाव खत्म होने तक हर महीने जारी रहेगा. उन्होंने कहा कि शीर्ष नेतृत्व के नियमित दौरों से पार्टी कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ेगा और हर क्षेत्र में पार्टी की पकड़ मजबूत होगी. इसके अलावा बीजेपी प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय बंगाल में कैंप किए हुए हैं और उनके साथ अब अमित मालवीय भी बंगाल के रण में सह प्रभारी बनाए गए हैं. माना जा रहा है कि वह सोशल मीडिया पर पार्टी के चुनाव प्रचार अभियान की कमान भी संभालेंगे.

बंगाल की राजनीति को बखूबी समझने वाले और कभी ममता बनर्जी के जीत का प्रबंधन देखने वाले मुकुल रॉय अब बीजेपी खेमे में हैं. बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुकुल रॉय बंगाल में कमल खिलाने के लिए मोर्चा संभाले हुए हैं. इसी का नतीजा है कि टीएमसी के एक के बाद एक विकेट गिर रहे हैं. इसके अलावा बीजेपी टीम के 11वें खिलाड़ी प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष हैं, जो लगातार ममता के खिलाफ अभियान चला रहे हैं.

बता दें कि 2011 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने तीन दशक से पश्चिम बंगाल की सत्ता में काबिज लेफ्ट का सफाया कर दिया था. इस बीच बीजेपी धीरे-धीरे अपने संगठन को मजबूत बनाने में जुटी रही. 2016 के विधानसभा चुनाव में भी कुछ खास गुल खिला न पाने वाली बीजेपी ने 2019 के लोकसभा चुनाव में कुल 42 में से 18 सीटें जीतकर चौंका दिया था. वहीं ममता बनर्जी की टीएमसी को बीजेपी से सिर्फ चार ज्यादा यानी 22 सीट मिलीं थी. हालांकि, 2014 के लोकसभा चुनाव में टीएमसी को कुल 42 में से 34 लोकसभा सीटें जीती थी.

2019 के लोकसभा चुनाव में सफलता मिलने के बाद से बीजेपी को भी लगने लगा कि और अधिक मेहनत करने पर 2021 में ममता बनर्जी को उसी तरह से सत्ता से बाहर किया जा सकता है, जिस तरह से कभी 2011 में ममता बनर्जी ने लेफ्ट को किया था. राज्य में लेफ्ट और कांग्रेस को पीछे छोड़कर बीजेपी अब निर्विवाद रूप से नंबर दो की पार्टी बन चुकी है. वहीं, अब बीजेपी की नजर राज्य में नंबर वन पार्टी बनने का है. इसी कवायद में अमित शाह बंगाल के दौरे पर पहुंचे हैं और देखना है कि उनकी मेहनत कितनी रंग लाती है.

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