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Bihar Electon 2020: टिकट वितरण में समर्पण पर भारी पड़ी रिश्तेदारी, बड़े नेताओं के परिवार को मिली तवज्जो

Bihar Assembly Election 2020 बिहार चुनाव में करीब-करीब सभी दलों ने दर्जनों सीटें परिवारवाद के नाम पर न्योछावर कर दीं हैं। कई दलों के बड़े नेता भी परिवार के कारण ही आगे आए हैं। राजनीति में परिवारवाद पर आइए डालते हैं नजर।

राजनीति में परिवारवाद नया नहीं है। चाहे 1952 का पहला चुनाव हो या फिर वर्तमान 2020 का चुनाव, राजनीति में नेताओं के समर्पण से ज्यादा तवज्जो रिश्तेदारी को दी जाती रही है। यही ऐसा मुद्दा है जिसके खिलाफ विरोधी पार्टियां तक खुलकर बोलने से परहेज करती हैं, क्योंकि कोई पार्टी नहीं जिसने राजनीति में रिश्तेदारी को बढ़ावा देने में परहेज किया हो। बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में भी नेताओं की रिश्तेदारी, समर्पण पर भारी पड़ी है। राष्‍ट्रीय जनता दल (RJD), कांग्रेस (Congress), हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) से लेकर जनता दल यूनाइटेड (JDU)लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) तक बड़ी संख्या में नेताजी के रिश्तेदार टिकट पाने में सफल रहे हैं।

कांग्रेस ने अभी तक परिवारवाद के नाम कीं आधा दर्जन सीटें

बिहार कांग्रेस ने दो चरणों के चुनाव के लिए लिए अब तक 45 उम्मीदवारों को टिकट दिए हैं, जिनमें आधा दर्जन से अधिक सीटें परिवारवाद के नाम पर न्योछावर की गईं हैं। इस मामले में जेडीयू भी पीछे नहीं है। जेडीयू की 115 में आठ सीटें ऐसी हैं जिनके उम्मीदवार परिवार के नाम पर टिकट लेकर चुनाव मैदान में हैं। जेडीयू की सहयोगी हम के सात में दो प्रत्याशी परिवारवाद के नाम पर मैदान में हैं। आरजेडी इसमें सबसे आगे दिख रहा है। आरजेडी के 11 प्रत्याशी ऐसे हैं, जो परिवारवाद के दम पर चुनाव लड़ रहे हैं।

नेहरू के दौर से ही पड़ गई थी वंशवाद की परंपरा

दरअसल, वंशवाद की नींव भारत की राजनीति में उस दौर में ही पड़ गई थी, जब देश की सत्ता पर कांग्रेस का राज था। पंडित जवाहर लाल नेहरू से लेकर इंदिरा गांधी, संजय गांधी, राजीव गांधी और सोनिया गांधी के बाद यह परंपरा राहुल और प्रियंका गांधी तक आ गई है। सिर्फ एक उदाहरण मात्र है। अमूमन सभी दल आज वंशवाद की परंपरा के पोषण में उतने ही मशगूल हैं, जितनी की । विश्लेषक भी मानते हैं कि जिस प्रकार बिहार की राजनीति से जाति प्रथा को अलग नहीं किया जा सकता है, ठीक उसी प्रकार देश या बिहार की राजनीति से वंशवाद को समाप्त करना मुश्किल है।

रिश्तेदारी के नाम पर टिकट पाने वाले नेता और पार्टी

आरजेडी

लालू प्रसाद के पुत्र: तेज प्रताप, हसनपुर

लालू प्रसाद के पुत्र: तेजस्वी यादव, राघोपुर

– जगदानंद सिंह के पुत्र: सुधाकर सिंह, रामगढ़

शिवानंद तिवारी के पुत्र: राहुल तिवारी, शाहपुर

– विजय प्रकाश की पुत्री : दिव्या प्रकाश, तारापुर

– राजबल्लभ यादव की पत्नी: विभा देवी, नवादा

– अरुण यादव की पत्नी: किरण देवी, संदेश

– वर्षा रानी के पति: बुलो मंडल, बिहपुर

– श्रीनारायण यादव के पुत्र: ललन कुमार, साहिबपुर कमाल

– क्रांति देवी के पुत्र: अजय यादव, अतरी

– कांति सिंह के पुत्र: ऋषि यादव, ओबरा

जेडीयू

– राजो सिंह के पोते: सुदर्शन, बरबीघा (कांग्रेस छोड़कर आए विधायक)

– जर्नादन मांझी के पुत्र: जयंत राज, अमरपुर

– धूमल सिंह की पत्नी: सीता देवी, एकमा

– कपिल देव कामत की बहू: मीना कामत, बाबूबरही

– कौशल यादव की पत्नी: पूर्णिमा यादव, गोविंदपुर (कांग्रेस छोड़कर आई विधायक)

– मनिंदर मंडल के पुत्र: निखिल मंडल, मधेपुरा

– राम लाखन यादव के पौत्र: जयवर्धन यादव, पालीगंज

– सत्यदेव नारायण आर्य के पुत्र: डॉ. कौशल किशोर, राजगीर

कांग्रेस

सदानंद सिंह के पुत्र: शुभानंद मुकेश, कहलगांव

– अवधेश कुमार सिंह के पुत्र: शशिशेखर सिंह, वजीरगंज

– आदित्य सिंह की बहू: नीतू सिंह, हिसुआ

– अब्दुल गफूर के पुत्र: आसिफ गफूर, गोपालगंज

शत्रुघ्न सिन्हा के पुत्र: लव सिन्हा, बांकीपुर

– निखिल कुमार के भतीजे: राकेश कुमार पप्पू, लालगंज

शरद यादव की पुत्री: सुभाषिणी राज राव, बिहारीगंज, मधेपुरा

हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा

जीतन राम मांझी के दामाद: ई. देवेंद्र मांझी, मखदुमपुर

जीतन राम मांझी की समधिन: ज्योति देवी, बाराचट्टी (रिश्तेदार पर पूर्व से विधायक)

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