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अकेले चुनाव लड़ने में तृणमूल असमर्थ , कांग्रेस और वाम मोर्चा का मांगा साथ।

नंदीग्राम

पश्चिम बंगाल में विधानसभा के 294 सीटों के लिए अप्रैल में चुनाव होने की संभावना जताई जा रही है, बंगाल चुनाव को लेकर अभी से ही सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। बीतें लोकसभा चुनाव में 18 सीटें जीतने वाली भारतीय जनता पार्टी का हौसला सातवें आसमान पर है। तो वहीं सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस को डर है कि सत्ता की चाभी हाथ से न फिसल जाए।शायद यही वजह है कि तृणमूल ने वाम मोर्चा और कांग्रेस को ममता बनर्जी का साथ देने की सिफ़ारिश कर रही है।

तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने पत्रकारों से कहा, ‘अगर वाम मोर्चा और कांग्रेस वास्तव में भाजपा के खिलाफ हैं तो उन्हें भाजपा की सांप्रदायिक एवं विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ लड़ाई में ममता बनर्जी का साथ देना चाहिए।’उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ही ‘भाजपा के खिलाफ धर्मनिरपेक्ष राजनीति का असली चेहरा’ हैं। हालांकि ममता बनर्जी का साथ देने की अपील को दोनों दलों ने इस सलाह को सिरे से खारिज कर दिया है।

कांग्रेस ने इस सलाह के बाद तृणमूल कांग्रेस को पेशकश की है कि वह भाजपा के खिलाफ लड़ाई के लिए गठबंधन बनाने के स्थान पर पार्टी (कांग्रेस) में विलय कर ले। समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस के इस कदम पर राज्य में मजबूत होने की कोशिश में लगी भाजपा का कहना है कि तृणमूल की यह पेशकश दिखाती है कि वह पश्चिम बंगाल में अप्रैल-मई में होने वाले संभावित विधानसभा चुनावों में अपने दम पर भाजपा का मुकाबला करने का सामर्थ्य नहीं रखती है।

Sachin Sarthak

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