Bihar

‘मगहिया डॉन’ अनंत सिंह: सोने का मुकुट पहन किया था विरोधी के घर हमला, ₹3 लाख से 68 करोड़… सिर्फ 15 साल में

बिहार में जब भी चुनाव की बात होती है, वहाँ के बाहुबलियों का जिक्र जरूर होता है। बिहार के बाहुबलियों के जिक्र के बिना वहाँ की राजनीतिक चर्चा अधूरी सी रहती है। बिहार में कई ऐसे बाहुबली हुए हैं, जो लोगों के बीच भय का दूसरा नाम बन गए थे। इसी श्रृंखला में आज हम बात करेंगे मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह (Anant Singh) की, जिन्‍होंने राष्‍ट्रीय जनता दल (RJD) के टिकट पर मोकामा से विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन किया है।

मोकामा सीट पर अनंत सिंह की पत्‍नी नीलम देवी ने भी नामांकन किया है। चुनावी हलफनामे में अनंत सिंह ने अपने ऊपर चल रहे मुकदमों और संपत्ति के बारे में जानकारी दी है। अनंत सिंह पर ज्यादा केस होने की वजह से उन्हें नामांकन रद्द होने का खतरा है। इसलिए अनंत सिंह ने अपनी पत्नी नीलम देवी को भी निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन करवाया है। अगर अनंत सिंह का नामांकन खारिज नहीं होता है तो उनकी पत्नी नीलम देवी अपना नाम वापस ले लेंगी। यानी चित भी मेरी और पट भी मेरी।

अनंत सिंह को उनके समर्थक ‘छोटे सरकार’ और मगहिया डॉन कहते हैं। जिस अनंत सिंह को कल तक तेजस्वी यादव असामजिक तत्‍व कह कर नकार रहे थे, आज वही अनंत सिंह राष्‍ट्रीय जनता दल का ‘दुलारा’ बन गया है।

राजनीति में लालू यादव के धुर विरोधी रहे अनंत सिंह अब उनके बेटे तेजस्वी को सीएम बनाने के लिए वोट माँगेंगे। नीतीश कुमार से बगावत के बाद ‘छोटे सरकार’ का लालू प्रेम उमड़ने लगा था। उसी का नतीजा था कि 2019 के लोकसभा चुनाव में अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी को मोकामा से टिकट मिल गया। हालाँकि वह जदयू के ललन सिंह से चुनाव हार गई थीं। अनंत सिंह की पत्नी के लिए तेजस्वी यादव भी वोट माँगने मुंगेर गए थे। लेकिन 2015 के विधानसभा चुनाव में लालू यादव मंच से अनंत सिंह के खिलाफ आग उगलते थे।

बाहुबली अनंत सिंह यहाँ से चार बार से विधायक हैं। 2015 में निर्दलीय लड़े थे। इस बार राजद ने उन्हें टिकट दिया है। पिछली बार भी नॉमिनेशन के वक्त वो जेल में थे और इस बार भी। जेल से कुछ समय के लिए कड़ी सुरक्षा में बाहर निकले और नामांकन दाखिल किया। उन्होंने जो एफिडेविट दाखिल किया है उसके मुताबिक उनकी संपत्ति और क्रिमिनल केस लगातार बढ़ रहे हैं।

5 साल में ढाई गुना बढ़ी संपत्ति, 38 मामलों में नामजद
अनंत सिंह ने सिर्फ अपनी प्रॉप्रटी में ही इजाफा नहीं किया है, बल्कि उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमों में भी पिछले 5 साल में दोगुने से ज्यादा का उछाल आया है। साल 2015 में अनंत सिंह के ऊपर 16 क्रिमिनल केस थे जबकि इस बार वह कुल 38 मामलों में नामजद हैं। अनंत सिंह जब से विधायक बने हैं, तब से संपत्ति के मामले में तो उन्होंने वाकई दिन दुगनी, रात चौगुनी तरक्की की है।

चुनावी हलफनामे को देखने से पता चलता है कि बाहुबल के साथ अनंत सिंह का धन बल भी बढ़ता गया है। अनंत सिंह अब धनबली भी हैं। 2015 के विधानसभा चुनाव में चुनावी हलफनामे के अनुसार अनंत सिंह के पास 28 करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्ति थी। लेकिन 2020 के विधानसभा चुनाव में यह ढाई गुनी बढ़ गई है। अब उनकी संपत्ति 68.55 करोड़ रुपए तक पहुँच गई है।

कैश में हुआ भारी इजाफा
अनंत सिंह के पास कैश में भी भारी इजाफा हुआ है। 2015 के हलफनामे के अनुसार उनके पास 40,800 रुपए नगद था। जबकि उनकी पत्नी नीलम देवी के पास 3,91,440 रुपए थे। वहीं, 2020 में अनंत सिंह के पास 50 गुना से अधिक कैश बढ़ गया है। उनके शपथ पत्र के अनुसार अनंत सिंह के पास 22,13,488 रुपए हैं। वहीं, पत्नी नीलम देवी के पास इस बार 11,83, 414 रुपए कैश हैं। हालाँकि इतनी बड़ी संख्या में कैश उनके पास आया कहाँ से, इसकी कोई जानकारी नहीं है।

15 साल में 2 हजार गुना बढ़ गई संपत्ति
पिछले 15 सालों में अनंत सिंह की संपत्ति में भारी इजाफा हुआ है। पहली बार जब वह 2005 में विधानसभा चुनाव लड़े थे, तब उनके पास संपत्ति महज 3.40 लाख रुपए की थी। 2010 में यह बढ़ कर 38.84 लाख रुपए की हो गई। 2015 में यह 28 करोड़ के करीब पहुँची और 2020 में 68 करोड़ पार कर गया है। इससे आप सहज अंदाजा लगा सकते हैं कि अनंत सिंह की संपत्ति किस रफ्तार के साथ बढ़ी है।

पत्नी के पास 2 लग्जरी कार
अनंत सिंह ऐसे तो लग्जरी गाड़ियों के शौकीन हैं। वह बिहार में मर्सिडीज की सवारी करते भी नजर आते हैं। लेकिन उनके पास खुद की सिर्फ एक 2003 मॉडल की स्कॉर्पियो है, जिसका बाजार मूल्य अभी 6 लाख रुपए है। जबकि उनकी पत्नी नीलम देवी के पास 25 लाख रुपए से अधिक की इनोवा क्रिस्टा है और एक 32.52 लाख की फॉर्च्यूनर है। एक 2018 और एक 2019 मॉडल की गाड़ी है। यानी दोनों गाड़ियों को उन्होंने हाल ही में खरीदा है।

पत्नी भरती है 1.20 करोड़ से ज्यादा रिटर्न
बाहुबली विधायक अनंत सिंह से ज्यादा उनकी पत्नी नीलम देवी के पास संपत्ति है। नीलम देवी की कमाई में 2017-18 के बाद जबरदस्त इजाफा हुआ है। 2017-18 तक नीलम देवी 57,83,029 रुपए रिटर्न फाइल करती थीं। इस दौरान अनंत सिंह महज 7,62,991 रुपए रिटर्न के रूप में फाइल करते थे। लेकिन 2019-2020 में अनंत सिंह ने 8,86,143 रुपए रिटर्न फाइल किए हैं। जबकि उनकी पत्नी नीलम देवी इस दौरान 1,20,30,261 रुपए रिटर्न फाइल की है। 2017-18 से तुलना करें, तो दोगुनी रिटर्न फाइल की है। यानी 2018-20 के बीच में अनंत सिंह की संपत्ति में भारी वृद्धि हुई है। ये आँकड़े तो इसी ओर इशारा कर रहे हैं।

मुकदमों का जाल भी बढ़ा है
धनबल के साथ ही अनंत सिंह का बाहुबल भी बढ़ा है। 2015 के विधानसभा चुनाव में उनके ऊपर 25 से ज्यादा केस दर्ज थे। वहीं, 2020 में अनंत सिंह ने अपने चुनावी हलफनामे में 38 केस का जिक्र किया है। इससे साफ जाहिर होता है कि उनका बाहुबल भी बढ़ा है। 2019 में उनके घर से एके-47 और बम भी मिला था। हथियार बरामदगी के बाद अनंत सिंह के खिलाफ आर्म्स एक्ट, गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) और विस्फोटक अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया।

मामले में अनंत सिंह ने दिल्ली के कोर्ट में जाकर सरेंडर किया था। उसी मामले में वह बेऊर जेल में बंद हैं। केस की जाँच अभी जारी है। हालाँकि अनंत सिंह पहली बार जेल नहीं गए हैं। अनंत सिंह अपनी जिंदगी में पहली बार 9 साल की उम्र में ही जेल जा चुके हैं। फिर कुछ दिनों में वापस भी छूट कर आ गए थे, लेकिन उसके बाद अपराध की दुनिया में उनका जलवा लगातार कायम है। अनंत सिंह के आतंक का अंदाजा का इसी बात से लगाया जा सकता है कि मोस्ट वॉन्टेड की लिस्ट में शामिल होने के बावजूद पुलिस के पास उसकी कोई फोटो उपलब्ध नहीं थी। पुलिस उस क्षेत्र में जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाती थी।

कभी रहे नीतीश के करीबी, लालू के कारण छोड़ना पड़ा था जदयू
कभी मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी रहे अनंत सिंह फिलहाल पटना के बेउर जेल में हैं। 2005 से 2014-15 तक अनंत सिंह मोकामा के जदयू विधायक रहे। उन दिनों लोकसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव करीब आ चुके थे। दोनों नेताओं ने महागठबंधन के बैनर तले कॉन्ग्रेस के साथ 2015 का विधानसभा चुनाव लड़ा।

इसी बीच 2015 में बाढ़ में एक युवक पुटुस यादव का अपहरण कर उसकी हत्‍या कर दी गई। इस हत्याकांड में अनंत सिंह का नाम आया। इससे लालू प्रसाद यादव काफी नाराज हाे गए, जिसका खामियाजा अनंत सिंह को भुगतना पड़ा। अतंत: सिंह को न केवल राजद छोड़ना पड़ा, बल्कि जेल भी जाना पड़ा। आज अनंत सिंह उसी लालू यादव के बेटे के लिए वोट माँग रहे हैं।

2015 में मोकामा से निर्दलीय जीत गए चुनाव, जदयू को हराया
इसके बावजूद अनंत सिंह ने निर्दलीय चुनाव जीता। उन्‍होंने चुनाव में जदयू के प्रत्‍याशी को भारी अंतर से हरा दिया। बिहार में महागठबंधन की सरकार टूटने के बाद भी अनंत सिंह की जदयू से दूरी बरकरार रही तो वे राजद के भी निशाने पर रहे। समय-समय पर तेजस्‍वी यादव उन्‍हें असामाजिक तत्‍व कह खारिज करते रहे। लेकिन इस बार समीकरण बदले दिख रहे हैं।

जदयू के राजीव लोचन से मुकाबला
मोकामा में अनंत सिंह का मुकाबला जदयू के उम्मीदवार राजीव लोचन सिंह से होगा। 2015 के विधानसभा चुनाव में मोकामा से 20 लोगों ने नामांकन दाखिल किया था। 15 लोग मैदान में थे, जिनमें से 13 की जमानत जब्त हो गई थी। अनंत सिंह का मुकाबला जदयू के नीरज कुमार से था, जिन्हें अनंत ने 18348 वोट से हराया था। अनंत सिंह को 54005 वोट मिले थे।

2005 फरवरी में हुए विधान सभा चुनाव में अनंत सिंह जदयू के टिकट पर चुनाव लड़े और जीते थे। उसी साल 8 महीने बाद विधानसभा का चुनाव दूसरी बार हुआ और उसमें भी अनंत सिंह जदयू के ही उम्मीदवार थे। उस वक्त मोकामा से वो जीते भी। यह सिलसिला 2010 के चुनाव में भी जारी रहा। लेकिन बिखराव 2014 में आया। तब लोकसभा चुनाव से पहले ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद की दोस्ती हो चुकी थी।

महिला से दुष्कर्म और हत्या के केस में बाहुबली विधायक का नाम
अनंत सिंह के खौफ और रसूख के किस्से पूरे बिहार में सुनने को मिलते रहते हैं। साल 2007 में एक महिला से दुष्कर्म और हत्या के केस में बाहुबली विधायक का नाम आया था। जब इसके बारे में एक निजी समाचार चैनल के पत्रकार उनका पक्ष जानने पहुँचे तो सत्ता के नशे में चूर विधायक और उनके गुंडों ने पत्रकार की जमकर पिटाई की। मामले ने तूल पकड़ा और विधायक की गिरफ्तारी भी हुई थी।

अनंत सिंह के आवास पर छापेमारी, आठ लोगों की गई थी जान
इससे पहले अनंत सिंह के घर पर मोकामा में साल 2004 में जब बिहार पुलिस की एसटीएफ ने छापेमारी की तब दोनों तरफ से घंटों गोलीबारी हुई। दरअसल, अनंत सिंह ने महलनुमा बने अपने आवास में कई समर्थकों को शरण दे रखी थी, जिससे पुलिस की छापेमारी में वह आसानी से बच जाए। इसके अलावा खुद को सुरक्षित रखने के लिए उसने एक विशेष कमरे का निर्माण भी कराया था। इस घटना के बाद अनंत सिंह सुर्खियों में आए। इस गोलीबारी में एक पुलिसकर्मी समेत अनंत सिंह के आठ समर्थक मारे गए। कहा जाता है कि इस घटना में विधायक को भी गोली लगी थी लेकिन वह फरार हो गया।

अपराध की दुनिया का बादशाह बनने के बाद अनंत सिंह ने सियासी गलियारों में भी अपनी पैठ बनानी शुरू की। इसी दौरान अनंत सिंह की मुलाकात नीतीश कुमार से हुई और 2005 में वह मोकामा से जदयू के टिकट पर चुनाव जीत गए। इसके बाद साल 2010 में भी वह जदयू के टिकट पर मोकामा से विधायक चुने गए। साल 2015 के चुनाव में लालू की पार्टी आरजेडी से गठबंधन के कारण जदयू ने सियासी नुकसान को देखते हुए अनंत सिंह का टिकट काट दिया। हालाँकि अनंत सिंह निर्दलीय चुनाव में उतरे और जीत हासिल की।

अनंत सिंह और नीतीश की दोस्ती
अनंत सिंह और नीतीश कुमार की दोस्ती की नींव साल 2004 के लोकसभा चुनाव के दौरान पड़ी थी। उस समय नीतीश कुमार बाढ़ संसदीय क्षेत्र से सांसद और अटल सरकार में रेलमंत्री थे। नीतीश के खिलाफ आरजेडी-लोजपा ने बाहुबली सूरजभान को मैदान में उतारा था। उस चुनाव में अनंत सिंह ने नीतीश की खूब मदद की।

इसके अलावा एक जनसभा के दौरान अनंत सिंह ने नीतीश को चाँदी के सिक्कों से तौला था। इसके बाद से ही अनंत सिंह नीतीश कुमार के करीबी बन गए और पूरे प्रदेश में उनकी तूती बोलने लगी। लेकिन साल 2015 में आरजेडी से जदयू की नजदीकियों के कारण अनंत सिंह किनारे कर दिए गए। वहीं से उनके बुरे दिन की शुरूआत हुई।

पटना के पॉश इलाके में है जमीन
अनंत सिंह के पास पटना के पॉश इलाके में भी करोड़ों की जमीन है। पटना से सबसे वीआईपी इलाका पाटलिपुत्र में उनकी जमीन है। इसके अलावा शहर के बीचोंबीच और पटना के फिनांस हब बंदर बागीचा में भी उनके पास प्लॉट है। साथ ही बिरला मंदिर रोड पर भी उनकी संपत्ति है। इसके अलावे बोरिंग कनाल रोड में भी उनकी जमीन है। साथ ही गौतम बुद्ध नगर यूपी में भी अनंत सिंह का प्लॉट है। इन सभी की कीमत 5 करोड़ रुपए के करीब आँकी गई है।

अनंत सिंह के शौक भी अनंत
2013 में अनंत सिंह फिर चर्चा में आए, जब वह अपनी शानदार मर्सडीज छोड़कर बग्घी पर सवार होकर विधानसभा पहुँचे। पटना की सड़क पर खुद बग्घी चलाकर निकला और देखने वाले देखते रह गए। खास बात यह हैकि इस बग्घी में लाइट और म्यूजिक सिस्टम भी लगा हुआ था। अनंत सिंह जानवार पालने के भी शौकीन हैं। उनके पास करीब 2 लाख रुपए के हाथी, घोड़े, गाय और भैंस हैं।

अपनी अजीबोगरीब शौक को लेकर भी वह चर्चा में रहते हैं। हाथी, घोड़ा और गाय पालने के शौकीन अनंत सिंह को हथियारों का भी शौक है। कहते हैं कि अगर उन्हें कोई घोड़ा पसंद आ जाए, तो उसे खरीदे बिना चैन नहीं लेते। इसको ऐसे भी समझिए कि एक बार अनंत सिंह को लालू प्रसाद का एक घोड़ा पसंद आ गया। वो उसे खरीदना तो चाहते थे, लेकिन उन्हें ये भी पता था कि लालू उन्हें ये घोड़ा नहीं बेचेंगे। तो उन्होंने किसी दूसरे से वो घोड़ा खरीदवाया और बाद में उस घोड़े पर बैठकर मेला घूमने गए। एक बार उन्हें एक शख्स की मर्सिडीज पसंद आ गई थी, तो इन्होंने उसे कुछ दिनों के लिए रख लिया था।

जब सोने का मुकुट पहन राजा की तरह किडनैपर्स पर हमला किया था
नब्बे का दशक बिहार के माथे पर लगा वो कलंक है, जिससे दशकों तक यह राज्य जूझता रहेगा। समय-दर-समय और शहर-दर-शहर अपराध होते रहे और सरकार चादर तानकर सोती रही। कानून की किताब में शायद ही कोई ऐसी धारा बची हो, जिसके तहत अनंत सिंह के नाम पर केस दर्ज न हो। अनंत सिंह पर ढाई दर्जन से अधिक संगीन मामले दर्ज हैं।

इनमें कत्ल, अपहरण, फिरौती, डकैती और बलात्कार जैसे तमाम संगीन मामले शामिल हैं। अकेले बिहार बाढ़ थाने में ही कुल 23 संगीन मामले दर्ज हैं। ये बात दीगर है कि अनंत सिंह अपने रसूख से इनमें से कई मामलें में बरी हो चुके हैं।

इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि 1990 के दशक में इसके पास के ही गाँव के बदमाश ने बाढ़ बाजार से एक व्यापारी को किडनैप कर लिया था। पुलिस कुछ कर नहीं पाई और मामला अनंत सिंह के पास गया। अनंत ने अपने गुर्गों के साथ किडनैपिंग करने वालों के घर पर धावा बोल दिया। दोनों ओर से जबरदस्त गोलीबारी हुई, जिसमें कई लोग मारे गए।

हालाँकि बाद में इस घटना ने जातिवादी रंग ले लिया और मामले में राजनीति शुरू हो गई और कई बड़े नेता भी इस लड़ाई में कूद गए थे। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि जब वो किडनैपर्स पर धावा बोलने आया तो वह (अनंत सिंह) घोड़े पर सवार होकर सबसे आगे चल रहा था और इतना ही नहीं अनंत सिंह ने अपने सिर पर सोने का मुकुट पहना हुआ था। यह उसका जताने का तरीका था कि वह एरिया उसका है और वही वहाँ का राजा भी है।

महज 9 साल की उम्र में पहली बार जेल जाने वाले अनंत सिंह का सियासी सफर जैसे जैसे आगे बढ़ता जा रहा है वैसे-वैसे उनकी अपराध की ‘अनंत’ कथा में नए-नए अध्याय भी जुड़ते जा रहे हैं, लेकिन अनंत सिंह की ‘अनंत’ अपराध कथा पर मौन हैं उनके सरपस्त नेता।

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