Meghalaya

मेघालय चुनाव: मतदाताओं को साधने के लिए UDP ने चली ‘लुभावने’ वादों की चाल

मेघालय विधानसभा चुनाव को लेकर सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने मतदाताओं को लुभाने की कोशिशें तेज कर दी हैं। मेघालय के प्रमुख विपक्षी दल यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (यूडीपी) ने इसी क्रम में सरकारी नौकरी में एससी/एसटी कैंडिडेट को और सहूलियत देने का एलान किया है। यूडीपी ने कहा है कि यदि 27 फरवरी को होने वाले विधानसभा चुनाव में वे सत्ता में आए तो एससी/एसटी उम्मीदवारों के सरकारी नौकरियों में प्रवेश के लिए ऊपरी उम्र की सीमा में वृद्धि करेंगे।
पार्टी ने अपने चुनावी मैनिफेस्टो में एलान किया कि सरकारी नौकरी के लिए मौजूदा 27 वर्ष की आयु को बढ़ाकर 32 साल कर दिया जाएगा। यानी पांच साल की और छूट दे दी जाएगी। घोषणापत्र में कहा गया कि पार्टी गरीबी रेखा (बीपीएल) के नीचे के बच्चों को मुफ्त शिक्षा प्रदान करेगी और किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य पेश करेगी। आको बता दें कि वर्तमान में पार्टी के 8 विधायक सदन में मौजूद हैं। यूडीपी ने राज्य में चूना पत्थर के खनन के लिए एकल विंडो एजेंसी स्थापित करने का भी वादा किया है। कांग्रेस को निशाने पर लेते हुए यूडीपी नेता ने कहा कि वर्तमान सरकार एक उदास राजनीतिक और आर्थिक भविष्य की विरासत को पीछे छोड़ देगी।मेघालय में एक चुनावी सभा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के भी निशाने पर कांग्रेस रही। उन्होंने कहा कि मेघालय में कांग्रेस की ‘बुरा बुरी’ लोगों के स्वास्थ्य का ध्यान रखने में विफल रही है।
सोमवार को कांग्रेस के गढ़ गारो हिल्स में रैली को संबोधित करते हुए गृह मंत्री ने राज्य के मुख्यमंत्री मुकुल सांगमा और उनकी पत्नी एवं मंत्री पर ‘मियां-बीबी’ सरकार कहकर निशाना साधा। राजनाथ ने कहा कि मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से केंद्र ने राज्य के लिए कोष का आवंटन बढ़ा दिया। लेकिन राज्य अभी तक विकास से दूर है। पूर्वोत्तर के राज्य में भाजपा को सत्ता में लाने की पुरजोर वकालत करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि पार्टी अगर सत्ता में आई तो मेघालय को पूर्व का स्कॉटलैंड बनाएगी। इस राज्य के पास पर्यटन में असीम संभावनाएं हैं।
मेघालय में 27 फरवरी को होने वाले मतदान के लिए जोरशोर से प्रचार जारी है। भाजपा पूर्वोत्तर इलाके के इस महत्वपूर्ण राज्य में केसरिया झंडा फहराने की तैयारी में है। मेघालय, भाजपा के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि पिछले 15 साल से कांग्रेस का रथ निर्बाध दौड़ता रहा है। वहीं, कांग्रेस अपनी कुर्सी को बचाने रखने की जद्देजहद में जुटी है।60 सदस्यीय विधानसभा के लिए कुल 374 उम्मीदवारों की किस्मत दांव पर है। कांग्रेस जहां सभी 60 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, वहीं वहीं एनपीपी 52, भाजपा 47, पीपल डेमोक्रेटिक फ्रंट 26, नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी 21, यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी 13, हिल स्टेट पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी 13 और दूसरी पार्टियां चुनावी मैदान में हैं। इस चुनाव में 85 निर्दलीय और 33 महिला प्रत्याशी भी अपनी किस्मत आजमां रही हैं। ये चुनाव न केवल कांग्रेस के लिए लिटमस टेस्ट की तरह है बल्कि भाजपा किसी भी सूरत में इस पहाड़ी राज्य में केसरिया झंडा फहराने की कोशिश में है।

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