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मध्य प्रदेश उपचुनाव: अब दिग्विजय सिंह संभालेंगे मैदानी मोर्चा, सभा के साथ बंद कमरे में बैठकें भी करेंगे….

भोपाल, जेएनएन। प्रदेश में सत्ता का भविष्य तय करने वाले 28 विधानसभा सीटों के उपचुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ के चौतरफा घिरने के बाद अब पूर्व मुख्यमंत्री href=”https://www.politrix.com/DigvijaySingh#/”>दिग्विजय सिंह मैदानी मोर्चा संभालेंगे। वे कमल नाथ के साथ कुछ जनसभाएं करने के साथ बंद कमरे में बैठकें भी करेंगे। अभी तक सिंह परदे के पीछे से काम कर रहे थे। बताया जा रहा है कि दो–तीन दिन में उनके कार्यक्रम तय हो जाएंगे।

सूत्रों के मुताबिक https://twitter.com/NarendraModiभाजपा ने जिस तरह से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ की घेराबंदी की है, उसे देखते हुए कांग्रेस ने भी रणनीति में परिवर्तन किया है। अब तक चुनाव प्रचार से लेकर प्रबंधन तक पूरी कमान कमल नाथ के हाथों में थी। उपचुनाव से पहले उन्होंने ही हर विधानसभा क्षेत्र के नेता और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की और अपनी टीम के साथ रणनीति तय की। चुनाव की घोषषणा होने के बाद से वह लगातार सभाएं भी कर रहे हैं। लंबे समय बाद यह पहली बार है कि भाजपा के निशाने पर दिग्विजय सिंह नहीं, बल्कि कमल नाथ हैं। पार्टी उनकी चौतरफा घेराबंदी भी कर रही है। प्रदेश की मंत्री और डबरा से भाजपा प्रत्याशी इमरती देवी के खिलाफ उनकी टिप्पणी ने कांग्रेस को बैकफुट पर ला दिया है।

भाजपा से मुकाबले में अकेले प़़डते जा रहे कमल नाथ का साथ देने के लिए अब रणनीति के तहत दिग्विजय मैदानी मोर्चा संभालने जा रहे हैं। वह स्वयं कह भी चुके हैं कि इस उपचुनाव में उनकी भूमिका सिर्फ भाजपा और दलबदलुओं को चुनाव हराने और कमल नाथ को फिर से मुख्यमंत्री बनाने की है। इस बीच, पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरण यादव को अधिक सक्रिय किया गया है।

सूत्रों का कहना है कि दिग्विजय सिंह की अनूपपुर, ब्यावरा, मुंगावली और अशोकनगर में जनसभाएं कमल नाथ के साथ होंगी। इसके अलावा वे अलग–अलग क्षेत्रों में दौरा करेंगे। इस दौरान जनसभा के साथ बंद कमरे में बैठकें भी होंगी। उनका फोकस जनसभा करने से ज्यादा स्थानीय स्तर पर समीकरण जमाने पर रहेगा।

कार्यकर्ताओं के पसंदीदा हैं दिग्विजय : मिश्रा

उपचुनाव के मीडिया प्रभारी केके मिश्रा का कहना है कि दिग्विजय सिंह मध्य प्रदेश में कार्यकर्ताओं के सबसे पसंदीदा नेता हैं। सत्ता और संगठन में उनकी उपस्थिति हमेशा ऐतिहासिक तौर पर दर्ज हुई है। चुनाव के अंतिम दौर में उनका दौरा पार्टी और उम्मीदवारों को मजबूती देगा।

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